Shree Shatrunjay Tirth (Palitana)

 

 

श्री शत्रुंजय तीर्थ (पालिताना)

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मंदिर का दृश्य |


palitaana

मुलनायक भगवान

श्री आदेश्वर भगवान ,शांत व सुन्दर , श्वेत वर्ण (श्वे. मंदिर ) |


 तीर्थ स्थल –

                                शत्रुंजय नदी के किनारे पालिताना ग़ाव के करीब ६ की. मी. दूर पर्वत पर |पर्वत की चडाई लगभग ४ क. मी. |


प्राचीनता –

                                पुराने ज़माने में इससे पुंडरिक गिरी कहते थे |शास्त्रों में इस महान तीर्थ के १०८ नाम दिए गए है |इस तीर्थ में अनेक उद्धदार हुए | इनमे सोलह उद्धदार हुए |

पहला: श्री आदेश्वर भगवान के पुत्र श्री भारत चक्रवती द्वारा |

दूसरा: श्री दण्डवीरय राजा द्वारा|

तीसरा : पहले व दुसरे तीर्थंकरो के बीच काल में इशानेन्द्र द्वारा |

चौथा : श्री महेंद्र इंद्र द्वारा |

पांचवा : पांचवे देवलोक के इंद्र द्वारा |

छठा : श्री इंद्र चम्रेन्द्र द्वारा |

सातवाँ : श्री अजितनाथ भगवान के काल में श्री सागर चक्रवती द्वारा |

आठवा : श्री अभिनन्दन भगवन के काल में श्री व्यन्तरेन्द्र द्वारा |

नव़ा : श्री चंद्रप्रभ भगवन के काल में राजा श्री चंद्रयशा द्वारा |

दसवां: श्री शांतिनाथ भगवान के सुपुत्र श्री चक्राउद्ध द्वारा |

गयारह्वा: श्री मुनिसुव्रत स्वामी भगवान् के काल में श्री रामचन्द्रजी द्वारा |

बारहवां: श्री नेमिनाथ भगवान के काल में पांडवो द्वारा |

तेहरव़ा: वि. सं. १०८ में महुवा निवासी श्री जावद शाह द्वारा |

चौध्वा : वि. सं. १२१३ में राजा श्री कुमारपाल के समय श्री वाहाद मंत्री द्वारा |

पंद्रहव़ा: वि. सं. १३७१ में श्री समराशाह द्वारा |

सोलहव़ा: वि. सं. १५८७ वैशाक कृष्णा ६ को चितोद निवासी श्री कर्मा शाह द्वारा |

 

परिचय –

                         भगवान आदेश्वर पूर्वनवाणु बार सिद्धाचल गिरिराज पर पधारे थे |इस अवसर की पावन स्मृति में नवाणु यात्रा व चातुर्मास करने भारत के कोने-कोने से यात्रीगण यहां आते है |कार्तिक पूर्णिमा ,चैत्र पूर्णिमा ,फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी व अक्षय तृतिया को यात्रा करने व पूजा का लाभ लेने हजारो यात्रीगण आकर अपने अपने मनोरथ पूर्ण कर,पार्जन करते है |

                         यहां के वार्षिक मेले निम्न प्रकार के होते है |

कार्तिक पूर्णिमा |

फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी -छह कोस की प्रदक्षिणा

चैत्री पूर्णिमा |

वैशाख शुक्ला तृतिया – वर्षीतप के पार्नो का तप |

वैशाख कृष्णा छट |

                         यहा पलिताना तीर्थ में निम्न प्रकार के टुंक है | नव टुंको का विवरण निम्न प्रकार है |

१. सेठ नरशी केशवजी की टुंक |

२. चौमुख्जी टुंक |

३. छिपा वसही टुंक |

४. साकर वसही टुंक |

५. नन्दीश्वर टुंक |

६. हिम वसही टुंक |

7. प्रेम वसही टुंक |

८. बाला वसही टुंक |

९. मोतिशाह टुंक |

                            पाहड पर पहुचते ही ऐसा लगता है जैसे हम देवलोक में आ पहुंचे |सम्पूर्ण पाहड सैकड़ो मंदिरों का दृश्य जो विभिन्न कलाओं से उक्त है |जब तक वहा रहे तब तक न भूक की इच्छा होती है न पयास की |इस पाहड के एक और शत्रुंजी नदी बहती है, जिसकी ठंडी मलयानील रुपी पवन यानि हवा का स्पर्श बराबर यात्रीओ को भाव-विभोर किए रहता है : दूसरी ओंर ग़ाव के अनेक मंदिर एक पुनय आभा बिखेरते नजर आते है |

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Shree Shatrunjay Tirth 100 years ago