Shri Girnarji Tirth

 

 

श्री गिरनार तीर्थ/ Shri Girnar Tirth

Shri Girnar Tirth - Jain Tirth

मंदिर का दृश्य |


Shri Neminath Bhagwan - Girnar Tirth (One of the Oldest idol in the world , Approx 84,785 years old)

मुलनायक भगवान

श्री नेमिनाथ भगवान शयाम वर्ण ,पद्मासन्स्थ ,१४० सें. मी. (श्वे. मंदिर )|

(यह नेमिनाथ भगवानजी की मूर्ति पूरी दुनिया में सबसे प्राचीन मानी जाती है| यह मूर्ति लगभग ८४,४८५  साल पुरानी है|)

श्री नेमिनाथ भगवान शयाम वर्ण ,पद्मासन्स्थ (दी. मंदिर) |


 तीर्थ स्थल –

                                जूनागढ़ के पास समुंद्र की सतह से लगभग ३१०० फुट (९४५ मीटर ) ऊँचे गिरनार पर्वत पर|


 प्राचीनता –

                                बारहवी शताब्दी में सिद्धराज के मंत्री श्री सज्जन शाह व वस्तुपाल तेजपाल द्वारा यहां जिनोर्द्वार होने का उल्लेख है |वर्तमान चौबिसी के बाइस्वे तीर्थंकर श्री नेमोनाथ भगवन ने यही पर दीक्षा ग्रहण की व तपसया करते हुए केवलज्ञान पाकर मोक्ष सिधारे श्वे. जैन शास्त्रों में इससे नेमिनाथ पर्वत व शत्रुंजयगिरी की पांचवी टुंक भी बताया गया है |

                                आचारंगसूत्र में भी इस तीर्थ का उल्लेख किया गया  है | कश्मीर के शेष्टि श्री अजित शाह तथा रत्न शाह द्वारा वीर नि. सं. १०७९ (वि. सं. ६०९) में इस तीर्थ का उधार होने का उल्लेख है | इनके अलावा भी प्रीयदर्शी राजा संप्रति,राजा कुमारपाल ,मंत्री सामंतीसिंह ,संग्राम सोनी , आदि अनेको राजाओ मंत्रियो द्वारा यहां पर जिणोरद्वार करवाने के व मंदिर निर्मित करवाने के उल्लेख मिलते है |

 


 परिचय-

                                प्रथम तीर्थंकर श्री आदेश्वर भगवान के काल से चरम तीर्थंकर श्री महावीर भगवान के काल तक अनेको चक्रवतीओ, राजाओ व शेष्टि द्वारा रैवतचाल की यात्रा किए का उल्लेख मिलता है | पूर्व काल में अनेक तीर्थंकरो का यहां पदापर्ण हुआ है |कहा जाता है की , भावी चौबीसी में बीस तीर्थंकर यहां से मोक्ष सिधारे है |

                               हिन्दू व मुसलमान भी इस जगह को अपना अपना तीर्थधाम मानते है व जगह जगह उनके भी मंदिर व स्थान बने हुए है | अत: वे भी हमेशा सैकड़ो की संखया में दर्शनार्थ इस तीर्थ में आते है |

                               गिरनार पर्वत की तलेटी का नगर जूनागढ़ है |तलेटी के मंदिर के पास से ही पाहड का चढ़ाई शुरू होती है |चढ़ाई अति कटिन है |लगभग ३.० की. मी यानि  काग्भाग ४२०० सीधीया चढ़ने पर श्री नेमिनाथ भगवान की मुख्य टुंक के कोट का दरवाजा आता है |इसका निर्माण काल का व उधार का वर्णन किया गया है |यहां पांच टुंको का विवरण निम्न प्रकार से किया है |

१. श्री नेमिनाथ भगवान की |

२. श्री अम्बाजी की |

३. श्री नेमिनाथ भगवान और सांभकुमार के चरण |

४. श्री नेमिनाथ भगवान और प्रध्युमन के चरण |

५. श्री नेमिनाथ भगवान और गनधर वरदत्त मुनि की चरण पादुकाएं |

                              यहा पर हर मंदिर में शिखरों पर, छतो पर व स्थंबो पर की गई शिल्पकला अति दर्शनीय है |