Takhatgarh

तखतगढ़

तखतगढ़ एक नाम है उस नगर का जो प्रसिद्ध की दुनिया में शहरों से भी बढ़कर है जिसकी अल्प समय में महान उन्नति प्रशंसनीय है| चाहे आदिम युग हो या विज्ञान युग हर समय हर इंसान के दिल में भूतकाल की गौरव गाथा एक विशेष स्थान रखती है, जन्म भूमि सबसे बढ़कर स्मृति में रहती है|

राजस्थान में मुनियों का संयम एवं योद्धाओं की शूरता रण वीरता के कारण में जिसकी कोई सानी नहीं है, उसके पश्चिम में राणाप्रताप, जगडूशाह आदि देश भक्ति की याद दिलाता हुआ, माउंट आबू, राणकपुर ,उदयपुर, फालना का स्वर्ण मंदिर की नयनभिराय सौन्दर्य से स्वर्ग की अनुभूति करता हुआ, राजस्थान राज्य के पाली जिले की सुमेरपुर तहसील अपने अन्दर समेटे हुए गुलाबी नगरी जयपुर की तरह बसा हुआ पाली जिले का……..तखतगढ़ नगर ……

हस्तलिखित पुराने पट्टे देखने से यह पता चलता है की यह पहले जालोर जिल्ले में आता था, पर बाद में जब इसे खालसा घोषित किया गया, तब इसे बाली तहसील में गिना जाने लगा, वर्तमान में तखतगढ़ सुमेरपुर तहसील में है| विक्रम संवत् १९१० में जन स्थली के रूप में इसका प्रादुभार्व हुआ| कहते है की बालोतो के गाँव में जब ठाकुरों के अत्याचार के कारण आतंक फैला तो १५-२० घरों ने आपस में सलाह-मशविरा किया और जोधपुर दरबार के समक्ष वृतांत निवेदन किया और कहाँ की हम महाराजा तखतसिंहजी की यादगार में गाँव बसाना चाहते है| सुनकर रोमांचित ह्रदय से दरबार ने तुरंत इजाजत दे दी और सभी प्रकार की मदद भी दी|तुरंत एक मधुर-जल से परिपूर्ण कुँए का निर्माण कार्य शुरू हुआ पर वहा पानी फीका निकला, इसलिए वहां रहना पसंद नही किया, वापिस जोधपुर महाराजा के पास गए और कहा की एक कुआँ बना बनाया है वहाँ पर गाँव बसा ले| और जो बना बनाया कुआँ है उसकी लोकोक्ति है की यह वही कुआँ है सो सागर चक्रवती के ६०,००० पुत्रों द्वारा हाथ से खोदा गया था| वे अपने पिताजी को राज एक नया कुआँ हाथ से खोदकर पानी पिलाते थे|

तखतगढ़ नगर की पूर्ण स्थापना दरबार के आदेश से पंडित सुकदेवजी व अन्य पंडितों ने प्रशस्त योग देखर कोट द्वार सहित १९१४ में पुन: रचना की गई| उस समय तखतगढ़ नगर के दरवाजे की नीव कचरामुता गली में रखी गयी| तथा बाहर हनुमानजी का मंदिर बनाया गया| इस प्रकार चार हनुमानजी के मंदिर बनाये गए एक कचरामुता गली में, दुसरे बलाना के फलसे पर, तीसरा हनुमानजी की गली के नुक्कड़ पर, व चौथा द्वारका में| पंडितजी ने गाँव की रचना इस प्रकार से की है की एक भी जगह खाली कुण्ड में नहीं है| गाँव भरपूर बड़ा हुआ है बुजुर्गों से , सुना है की तखतगढ़ की जन्म पत्रिका बनवाई थी जिससे लिखा था की यह गाँव १२५ वर्ष तक बढ़ेगा और १००० साल तक फलेगा व उन्नति करेगा इसी कारण गाँव का जन्म काल वि.सं. १९१४ माना गया है|

तखतगढ़ में जैनों के सात मंदिर है| इस सातों मंदिर की प्रतिष्ठा महँ उपकारी तखतगढ़ उद्धारक प.पू. श्री कल्याण विजयजी म.सा. के कर कमलों द्वारा सुसंपन्न पत्थर से निर्मित सूर्य-चन्द्रमा की उपमा को सार्थकता प्रदान करते है|

बड़ा मंदिरजी : इस त्रिशिखरी विशाल मंदिरजी की प्रतिष्ठा जेठ सूद ७ विक्रम संवत् २०२४ में हुई थी इसमें विराजमान मुलनायक श्री आदेश्वर भगवान है| मुलनायक की अद्भूत प्रतिमा श्री सिद्धक्षेत्र पालीताणा की नरसिंह नाथ टुंक में से लायी गयी है| जिनकी अंजनशलाका वि.सं. १९१७ प्रथम माघ मासशुक्ल पक्ष में गुरूवार के दिन आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी द्वारा करायी गयी थी| मंदिर के अन्दर का दृश्य राणकपुर मंदिर जैसी व्यवस्था है|इस मंदिर में सुन्दर स्टील व आरास पत्थर के मनमोहक गलीचे बनाये गए है एवं इस मंदिर में कुल छोटे-बड़े २० पट्ट है| बड़ा मंदिरजी में प्रवेश करते है दाहिनी ओर श्री सीमंधर स्वामीजी देवली की प्रतिष्ठा की ५० वि सालगिरह पर स्वर्ण जयंती मोहत्सव वि.सं. २०७४ जेठ सूद ७ को तखतगढ़ में अष्टहिनका महा-मोहत्सव दी. २६-५-२०१७ से २-६-२०१७ जेठ सूद ७ को हजारों नगरवासियों की उपस्थिति में मनाया गया|

नया मंदिरजी : इस मंदिर की प्रतिष्ठा वि.सं. २०१३ के माघ सूद ६ बुधवार को हुई थी| इसमें मुलनायक श्री ऋषभदेव भगवान विराजमान है| इस त्रिशिखरी मंदिरजी में कुल छोटे बड़े २० जैन महातीर्थ के पट्ट है| श्रीपाल राजा व मयणा सुंदरी के भव्य मूर्ति दर्शनीय है| इस मंदिर के आगे विशाल चौक आ जाने से इसकी विशालता और भी बढ़ गयी है|

तीन मंदिर तालाब ऊपर : इन तीनों मंदिर की नींव एक ही दिन डाली गयी थी व उनकी प्रतिष्ठा भी एक ही दिन हुई| इनकी प्रतिष्ठा भी प.पू. कल्याण विजयजी म.सा. के करकमलों द्वारा हुई|

श्री पार्श्वनाथ भगवान का मंदिर : वि.सं. १९६७ के वैशाख सूद ३ के दिन तखतगढ़ निवासी श्री कस्तूरचंद परकाजी पोरवाल के पुत्रों द्वारा इस मंदिर की नींव का खात मुहूर्त किया और वि.सं. १९९० के वैशाख सूद ११ के दिन प्रतिष्ठा हुई जिसमें श्री पार्श्वनाथ भगवान मुलनायकजी विराजमान है|

श्री ऋषभदेव भगवान का मंदिर : वि.सं. १९७३ के माघ सूद १३ के दिन तखतगढ़ निवासी शा. धिराजी  परकाजी ओसवाल की ओर से मंदिर की नीव खातमुहूर्त हुआ| वि.सं. १९९० के वैशाख सूद ११ को ध्वजा भी इनकी ओर से चढ़ायी गयी| इस मंदिर के एक भाग में सुन्दर बगीची है मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो बड़े हाथी बनाये गए है जो एक कला का नमूना है| इसमें भी ऋषभदेव भगवान मुलनायकजी विराजमान है| इसके ठीक पास में जैन धार्मिक पाठशाला (विधाशाला) है जिसकी स्थापना महा सुदी वि.सं. २०१३ में की गयी थी|

 

श्री शांतिनाथ भगवान का मंदिर : इस मंदिर का निर्माण शा. रूपचंद जेरूपजी वालों ने करवाया था| इसकी प्रतिष्ठा वैशाख सूद ११ वि.सं. १९९० में हुई थी| मुलनायक श्री शांतिनाथजी भगवान विराजमान है| इस मंदिर का जिणोरद्वार श्री जैन संघ कराया गया और पुन: प्रतिष्ठा करवाई गयी|

श्री शांतिनाथ भगवान का मंदिर : यह मंदिर पुराना बस स्टैंड पर स्तिथ है यह शा ताराचंद चत्रभाणजी की ओर से बनाया गया है| मुलनायक श्री शांतिनाथ भगवान विराजमान है बस स्तान्द्पर होने से दिन में कितने ही यात्रिगन दर्शन का लाभ लेते है|

अम्बा माताजी का मंदिर : यह मंदिर राजकीय अस्पताल के सामने स्थित है यह मंदिर शा मंछालाल लखमाजी ने बनवाया था| यहाँ का शांत वातावरण बाहर घनी छायावाले नीम के पेड़ मन को शान्ति प्रदान करते है|

तखतगढ़ नगर में जैनों के मंदिर के शिवाय महादेवजी का मंदिर रामदेवजी का मंदिर, ठाकुरजी का मंदिर, हनुमानजी का मंदिर, महालक्ष्मी माताजी का मंदिर, शीतला माताजी का मंदिर, इत्यादि बहुत से मंदिर है|

तखतगढ़ नगर में सब सुविधा युक्त बस स्थानक, सरकारी निजी अस्पताल ,कन्या विधालय शास्त्री बाल मंदिर, जैन भोजनशाला, संघवी केशरी उच्च विधालय, बिजलीघर, दूरभाष केंद्र, पुलिस थाना और मनोहर उपयोगी पेड़ों से सुशोभित पूर्व से पश्चिम तक फैला हुआ तालाब जो गाँव के बीच में स्थित है| बुजुर्गों का कहना है की यह तालाब हर घर की तरफ से मोसा (खाट) की जगह जितना खोदा गया था, यह गाँव की एकता का सर्वोच्च उदहारण है|

आज तखतगढ़ नगर सभी सुख-सुविधाओं से संपन्न धर्मनगरी है  जीवन काल में यह अनूठा-अविस्मर्णीय,अलौकिक अवसर आया है|


श्री तखतगढ़ नगर से दीक्षित साधू-साध्वी भगवंत को कोटि-कोटि वंदन

* साधुजी *

प.पू. आ. श्री पूण्यरत्न सूरीजी म.सा.

प.पू. आ. श्री यशोरत्न सूरीजी म.सा.

प.पू. आ. रश्मिंरत्न सूरीजी म.सा.

प.पू. तत्व विजयजी म.सा.

पंन्यास श्री सत्वभूषण विजयजी म.सा.

प.पू. मुनिराज बोधीरत्न विजयजी म.सा.

प.पू. मुनिराज दीक्षितरत्न विजयजी म.सा.

प.पू. मुनिराज श्री विनीतरत्न विजयजी म.सा.

प.पू. मुनिराज श्री ऋषभरत्नविजयजी म.सा.

प.पू. मुनिराज श्री नम्ररत्न विजयजी म.सा.

प.पू. कल्याणरत्न विजयजी म.सा.

प.पू. सत्य विजयजी म.सा.

प.पू. अभयचन्द्र विजयजी म.सा.

प.पू. चंद्रकांत सागरजी म.सा.

प.पू. मोक्षांगरत्न विजयजी म.सा.

प.पू. रम्यगरत्न विजयजी म.सा.

प.पू. जिनांगप्रभ विजयजी म.सा.

प.पू. देवेशरत्न विजयजी म.सा.

प.पू. परमरत्न विजयजी म.सा.

प.पू. पूर्णकलश विजयजी म.सा.

प.पू. पूण्यधाम विजयजी म.सा.

* साध्वीजी *

साध्वीजी श्री पीनेशरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री जिनांगरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री विभातमाला श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री दाक्षिन्यरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री पुण्याधीरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री ललितांगरेखा श्रीजी म.सा. , साध्विजी श्री समाधीरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री वीतरागरेखा श्रीजी म.सा., साध्वीजी श्री करुणालता श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री ध्वजरेखा श्रीजी म.सा. , साध्विजी श्री निर्दोषरेखा श्रीजी म.सा. , साध्विजी श्री जिनेशगुणा श्रीजी म.सा. , साध्विजी श्री अचिंत्यप्रज्ञा श्रीजी म.सा. , साध्विजी श्री धैयदर्शिता श्रीजी म.सा. , साध्विजी श्री दीपांशुरेखा श्रीजी म.सा. , साध्विजी श्री द्रष्टिपूर्णा श्रीजी म.सा. , साध्विजी श्री जिनक्रुपा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री वीरकृपा श्रीजी म.सा. , साध्विजी श्री भक्तिकृपा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री अनंतवीरकृपाजी श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री अमामरेखा म.सा. , साध्वीजी श्री यंशागरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री रत्नांगरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री गुनांगरेखा म.सा. , साध्वीजी श्री विसिद्धममाला श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री गुणरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री कीर्तनरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री तारकरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री वीरांगरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री हर्षितरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री कुलरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री मधुरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री लक्षितरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री सिद्धांतरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री आगमरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री महाश्रुतरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री सम्यणरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री जिनरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री तत्वेशरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री हितविपुलरेखा श्रीजी म.सा., साध्वीजी श्री कुरतपुन्यारेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री भाविकारत्ना श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री संयमरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री लब्धिरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री भद्रेशरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री अमररेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री यशागरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री रत्नागरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री गुणांगरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री विरागप्रज्ञा श्रीजी म.सा. ,साध्वीजी श्री मलयरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री महायशरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री मनोर श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री करण श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री प्रसन्न श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री ललिता श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री विनय श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री सुमति श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री कंचन श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री कर्मज्ञा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री हर्षदरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री लक्षतरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री पियूषरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री मुक्तिरेखा श्रीजी म.सा. ,  साध्वीजी श्री इस्मीतादक्षिता श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री मतिप्रज्ञा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री जिनक्रुपा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री दिव्यकृपा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री भुवन श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री ज्ञान श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री कनक श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री शुवर्ता श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री हेमलता श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री प्रमोद श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री हेत श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री तारा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री स्वर्णलता श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री कल्पधर्मा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री पुनीतरेखा श्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री मोक्षरेखा श्रीजी म.सा.

दीक्षा अंगीकार कर इन सभी पवित्र मुमुक्षु आत्माओं ने न सिर्फ आत्मा का कल्याण किया है, अपितु अपने कुल, गोत्र और तखतगढ़ नगर का नाम रोशन किया है| आपने अपने संयमकुल में जिनशासन को शोभा बढ़ाकर नए कीर्तिमान स्थापित किये है| समस्त तखतगढ़ वासी आपकी संयम साधना के लिए नतमस्तक होकर नमन करते है | आपका संयम जीवन उज्जवल बने, ऐसी ह्रदयपूर्वक अभिलाषा |


श्री आदेश्वर भगवान जैन देवस्थान पेढ़ी (मोटी पेढ़ी) , तखतगढ़ (राजस्थान)

ट्रस्ट मंडल : २०१५ से २०१८

शा. सूरजमल ताराचंदजी बालदिया – अध्यक्ष

शा. विमलकुमार छगनलालजी : उपाध्यक्ष

शा. रमेशकुमार मायाचंदजी : सचिव

संघवी जीतेन्द्रकुमार लखमीचंदजी : सहसचिव

शा. रजनीकांत नेमीचंदजी : सहकोषाध्यक्ष

ट्रस्टीज : 

शा. सुरेशकुमार लालचंदजी , शा. पारसमल चुन्नीलालजी , शा. कांतिलाल पूनमचंदजी , शा. सूरजमल जीवराजजी , शा. भरतकुमार गणेशमलजी , शा. मोहनलाल मेघराजजी , शा. उत्तमकुमार कांतिलालजी जाडा , शा. जीतेन्द्र रायचंदजी सोलंकी , शा. धर्मेन्द्र मोहनलालजी राठोड, शा. जयंतीलाल जसराजजी  जैनम , शा. पोपटलाल चुन्नीलालजी , शा. राजेशकुमार कुंदनमलजी , शा. चम्पालाल रिकबीचंदजी ओसवाल , जयंतीलाल दासमलजी , शा. पारसमल जुहारमलजी राखडीया