Sudhanshusuriji

Aa. Shree Sudhanshusuriji Marasahebji

 

पू. आ. श्री सुधांशुसूरीजी (बांकली)

sudhaanshu m.

जन्म नाम : सुरतिंग भाई

जन्म स्थान : बांकली , जिला-पाली (राजस्थान),

माता : भद्रादेवी , पिता : श्री डायालालजी (व्यापार – मुंबई)

दीक्षा : वीर नि.सं. २४७१ , शाके १८६६ , वि.सं. २००१ , मगसर सुदी १०, नवंबर १९४५ , स्थान : मोतीशा माधवबाग (लालबाग), मुंबई

प्रदाता : पू. आ. श्री रामचंद्रसूरीजी सामुदायवर्ती – पू. मुनिवर्य श्री मलयविजयजी हस्ते दीक्षित होकर पू. मु. श्री मुक्ति विजयजी उर्फ़ “लघुरम” (बाद में आ. श्री मुक्तिचंद्रसूरीजी) के शिष्य बनाकर मु. श्री सुधांशुविजयजी म. सा. मान्करण हुआ| गणीपद : वि.सं. २०३४ में पू. गुरुदेव श्री हस्ते ” गणीपद” प्रदान

पंन्यास पद : वि.सं. २०३४ में धुलिया (महाराष्ट्र) में पंन्यास पद प्रदान

आचार्य पद : वीर. नि. सं. २०४२ , शाके १९०७ , वि.सं. २०४२ , मगसर सुदी ६ , शनिवार , दी. ६ दिसंबर , १९८६ को  लींबड़ी (गुजरात) में पू. आ. श्री मानतुंगसूरीजी हस्ते नमस्कार महामंत्र के तीसरे पद पर यानी आचार्य पद से अलंकृत करके पू. आ. श्री मुक्तिचंद्रसूरीजी के पट्टधर पू. आचार्य श्री सुधांशुसूरीश्वर्जी के नाम से प्रसिद्ध हुए|

स्वर्गवास : वीर नि.सं. २५१३ , शाके १९०८ , वि.सं. २०४३ , असोज वदी – ६ , अक्टूबर १९८७ को खंभात तीर्थ (गुजरात) में चातुर्मास में प्रतिकमन करते हुए कालधर्म पाए व् दुसरे दिन अग्नि संस्कार संपन्न हुआ | ऐसे महान आचार्य को कोटिश: वंदन व श्रद्धा के सुमन अर्पण |