Shree Sambhavnath Jain Temple

Shree Sambhavnath Jain Temple, VilliVakkam(Chennai)

 

 

श्री संभवनाथ जैन मंदिर, विल्लीवाक्कम

 

यहाँ एक अति प्राचीन शिव मंदिर है| प्रांतीय हिन्दू जन-जाती के लिए यह विशेष आस्था का केंद्र है| दूर-सुदूर से लोग इस मंदिर के प्रति अनन्य श्रद्धा रखते हुए दर्शनार्थ आते है| यह उपनगर चेन्नई रेलवे स्टेशन से करीब १० की.मी. दुरी पर स्थित है|

चेन्नई उपनगर विल्लीवाक्कम में मुलनायक तीर्थंकर परमात्मा श्री संभवनाथ भगवान का जिनालय स्थित है| मूल गम्भारे में मुलनायकजी की शुभ श्वेतवर्णीय २७ इंच देह प्रमाण युक्त अति लावण्यमयी प्रतिमा शोभायमान है| पद्मासन में विराजित ये स्वामी प्रकाश के महापुंज जैसे लगते है| प्रभुजीकी प्रतिमा को निरख-निरख कर भक्त के नेत्र थकने का नाम नहीं लेते है| ये प्रभु तो मुक्तिपुर ले जाने वाले सार्थवाह प्रतीत होते है| श्री संभवनाथ परमात्मा का यह जिंबिम्ब नयनमय तथा अतिप्रभावक है| शुभ्रवर्णीय यह जिनबिंब विशेष आकर्षण अत्पन्न करता है|यह मनोहर प्रतिमा, भक्त के आत्म प्रदेश में आध्यातम की सुरभि का महकारक है| मूल गंभारे में त्रिभुवन नायक की एकल प्रतिमा प्रतिष्टित है|

श्री संभवनाथ प्रभु की अपलक दृष्टी ही सुख के साम्राज्य का दिव्याभास् कराती है | आत्मा का शुद्धरूप प्रकट होने से पूर्ण है और घाटी कर्म के श्रय होने से अनंत गुण प्रकटीकारन के कारण गुणों के भंडार है| ऐसे प्रभु की भाव से पूजा करने से दुःख दारिद्र्य दूर हो जाते है और नरक-तिर्यंच आदि की दुर्गति तला जाती है| जो भव्य जीव प्रभु के चरणकमल में मन रूप भ्रमर को टिकता है| उनके जन्म-मरण का संसार स्वत: ही कट जाता है|

मूल गंभारे के बाहर छोटा किन्तु शांत, सात्विक रंगमंडप के एक गोखले में दादागुरुदेव श्री जिन कुशलसूरीश्वरजी म.सा. की प्रतिमा विराजित है| प्रवचन मुद्रा में दादा गुरुदेव की यह प्रतिमा मनोरम्य है|

इस जिनालय की प्रतिष्ठा वि.स. २०६०, दिनांक १.३.२००४, सोमवार को प.पू. आचार्य देव श्रीमद् विजय नित्यानन्दसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में हर्षोल्लास तथा धूमधाम से सुसंपन्न हुई|

यहाँ का श्री संघ समन्वयकारी है| देवलोक में कतिपय अप्राप्य सुविधाओं को प्राप्त करवाने की पुरजोर कोशिश श्री संघ द्वारा चल रही है|