Shree PushpViman Sambhavnath Jain Temple

Shree PushpViman Sambhavnath Jain Temple ,Vilangadupakkam (Chennai)

 

 

श्री पुष्पविमान संभवनाथ जैन मंदिर, विलनगाडूपाक्कम

 

चेन्नई धर्मधरा का उपनगर कन्नमपालयम| चेन्नई का महामयीमाहि तीर्थ स्थान जहाँ आदेश्वर दादा विराजते है, उसी रेडहिल्स के नजदीक का यह क्षेत्र है कन्नमपालयम| रेड हिल्स को केशरवाडी के नाम भी जाना जाता है, इस मंदिर के दर्शन करने से समीपस्थ पंचतीर्थी दर्शन सम अनुपम लाभ मिलता है|

विलनगाडूपाक्कम विलेज में पुष्पविमान सदृश्य यह संभवनाथ परमात्मा का जिनालय , शाह हरीशभाई, शान्तिलाल परिवारवालों ने स्वद्रव्य से निर्मित किया है| चेन्नई सेंट्रल से लगभग १७ की.मी. दुरी पर बसा यह उपनगर केशरवाड़ी तीर्थ के नजदीक होने से काफी सुविख्यात है| यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर भी है जो यहाँ की जनजाति में विशेष श्रद्धा का केंद्र है| किसी समय यह क्षेत्र पूर्ण खेती-बाड़ी के व्यवसाय से जुडा था, आज यहाँ गोदामों की भरमार हो गई है| यहाँ राईस मील(चावल की मिलें) बहुतायत में उपलब्ध है| चेन्नई-कलकत्ता राजमार्ग से लगभग १.५ की.मी. दुरी पर यह मंदिर है|

यहाँ तीसरे तीर्थंकर परमात्मा श्री संभवनाथ भगवान का पुष्पविमान जिनालय है| मूल गम्भारे में मुलनायक श्री संभवनाथ भगवान की श्वेतवर्णीय ३१ इंच देहप्रमान युक्त प्रतिमा पद्मासनस्थ विराजमान है| प्रभुजी के मुखमंडल का तेज तथा स्मित , दर्शक के ह्रदय को प्रेमपल्लवित करती है| इस अनुपम जिनमूर्ति की छवि ह्रदय में सहज ही बस जाती है, ये परमात्मा सुन्दर कलात्मक परिकर के मध्य शोभित है|

प्रभुजी के दायी और प्रथम तीर्थंकर श्री आदेश्वर दादा की मनोहरी प्रतिमा पद्मासनस्थ आरूढ़ है| श्वेतवर्णीय २७ इंच देहप्रमाण युक्त जिनबिंब का सौन्दर्य अद्भुत है| परमात्मा के बायीं और तेइसवें तीर्थंकर परमात्मा शंखेश्वर पार्श्व प्रभु की प्रतिमा पद्मासनस्थ विराजित है| श्री पार्श्वप्रभु की २७ इंच कायायुक्त श्वेतवर्णीय पाषण प्रतिमा की अनुपम छवि चित्ताकर्षक है|

मूल गंभारे के बाहर ४५० वर्ग फीट माप के सौन्दर्ययुक्त कलात्मक रंगमंडप के गोखलों में शासन रक्षक देव-देवियों की प्रतिमाएं प्रतिष्टित है| श्री पार्श्वयक्ष, श्री २४ भुजा पद्मावती देवी, कमलवासिनी श्री लक्ष्मीदेवी, शासनदेवी श्री मणिभद्रवीर देव की चित्ताकार्शक प्रतिमाएं विराजमान है| रंगमंडप के बाहर गणधर गौतम स्वामी, श्री हंससागरसूरीजी म.सा., श्री नरेन्द्रसागरसूरीजी म.सा. श्री मुनिनन्द्रसागरसूरीजी म.सा. की गुरुमूर्ति पाषण में उकेरित कर प्रतिष्टित है| इस मंदिर का सौन्दर्य आँखों को आनंदित करता है|

इस जिनालय की प्रतिष्ठा वि.सं. २०६७, वैशाख वद १, दिनांक २८.५.२०१० , शुक्रवार के शुभ दिवसे प.पू. आचार्य देव श्रीमद् विजय जिनोत्तमसूरीश्वरजी म.सा. के कर कमलों द्वारा हर्षोल्लास से संपन्न हुई| यहाँ के लोगों की मान्यता है की विराजित संभवदादा हर असंभव को संभव करते है कठीन से कठिन मुसीबत भी इनकी कृपा दृष्टि से हल हो जाती है|