Pomava

पोमावा

अहमदाबाद-दिल्ली राष्ट्रीय महामार्ग पर पाली जिले के सुमेरपुर कसबे के निकट लगभग ५कि.मी. की दुरी पर”पोमावा” नामक एक छोटा-सा गांव बसा हुआ है| गांव में करीब १००-१२५ जैन घरों की बस्ती है|

गांव में “श्री सुविधिनाथ स्वामीजी” का प्राचीन मंदिर है| कालांतर में इस मंदिर का भव्य दिव्य जिणोरद्वार व पुनरुद्वार वि.सं. २०६१ वैशाख सुदी १४, रविवार, दी.२२.५.२००५ को पावन महामोहत्सव के अवसर पर संपन्न हुआ| इस नौ दिवसीय महामोहत्सव के अवसर पर संपन्न हुआ| इस नौ दिवसीय महामोहत्सव में श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथजी एवं मुनिसुव्रतस्वामीजी के जिनबिंबो की अंजनशलाका वैशाख सुदी ११. दी. २०.५.२००५ को एवं पान प्रतिष्ठा वैशाख सुदी १४, दी.२२.५.२००५ को मंगलमय संपन्न हुई| इसे प.पू. आचर्य श्री विजय नीतिसुरिश्वर्जी महाराज के समुदायवर्ती प.पू. आचार्य श्री विजयपद्मसुरिश्वर्जी महाराज तथा प.पू. आचार्य विजय दानसूरीश्वर्जी महाराज के समुदायवर्ती, प.पू. आचार्य श्री विजय कीर्तियशसुरिश्वर्जी म.सा. की मंगलमय निश्रा प्राप्त थी| आज यह शिखरबंध प्रसाद गांव में शोभायान है|

वि.सं. १९७७ अर्थात सैम १९२१ ई. में यहं “तेडा बावनी मोहत्सव” हुआ| यह मोहत्सव श्रीमान् शा. रतनचंदजी मनरूपजी द्वारा उनकी माताश्री वीनाबाई व धर्मपत्नी खुमिबाई के बीसस्थानक ओली के समापन निर्मित करवाया गया| इस मोहत्सव की विशालता एवं भव्यता के कारण पोमावा गांव गोडवाड़ में ही नहीं अपितु संपूर्ण मारवाड़ में प्रसिद्ध हुआ| गांव की निर्देशिका से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोहत्सव में समस्त पट्टी के जैन समाज को आठ दिनों की नवकारशी का आमंत्रण दिया गया था|

इस मोहत्सव में श्री शान्तिसूरीश्वर्जी महाराज (मांडोली वाले) पधारे थे|१८ वर्ष पश्चात आपश्री का पुन: पोमावा में आगमन हुआ| तब गाँववालों के परीजनों के मनोदशानुसार वि.सं. १९९५, वीर नि.सं. २४६५, सन १९३९ ई., पौष सुदी ९ को शुभदिन की कुन्थुनाथ प्रभु की प्रतिमाजी की स्थापना की गई| वि.सं. २००७ में पं. हीरमुनिजी के हस्ते श्री दीपमुनिजी को दीक्षा प्रदान की गई|

गांव में ही हस्तिमलजी सिरोहिया परिवार द्वारा निर्मित पाठशाला एवं श्री मूलचंदजी राठोड परिवार द्वारा निर्मित प्राथमिक उपचार केंद्र चलाए जाते है| इसी प्रकार श्री छगनलालजी राठोड परिवार द्वारा पेयजल की टंकी का निर्माण हुआ है| श्री भबूतमलजी पाल्रेचा परिवार ने श्मशानभूमि निर्माण में सहयोग दिया है|

सुविधाएं : गांव में मंदिर के पीछे न्यातीनोहरा है, जिसमें सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होते है| इसके समीप ही उपाश्रय है| धर्मशाला एवं भोजनशाळा की व्यवस्था सुचारु रूप से उपलब्ध है|भोजनशाला की व्यवस्था “पोमावा रॉयल ग्रुप” देखता है|