Nipal

निपल

राजस्थान प्रांत के पाली जिले में जोधपुर-उदयपुर मेगा हाईवे पर नाडोल तीर्थ से वाया केशरगढ़ होकर १०कि.मी. दूर नदी किनारे एक नगर बसा है – “निपल” | नगरजनों के अनुसार, यह गांव २५०० वर्ष प्राचीन है और नाडोल के राजा लाखन के समय का है| इसे राजा कनक ने बसाया था|यहाँ नाडोल के बाद इस परिसर का सबसे प्राचीन मंदिर है|

“जैन तीर्थ सर्वसंग्रह” ग्रंथ के अनुसार, श्री संघ ने मुख्य बाजार में, वि.सं. १२०० में, घुमटबद्ध जिनालय का निर्माण करवाकर ८वे तीर्थंकर श्री चन्द्रप्रभुजी सह पाषण की ७ व धातु की २ प्रतिमाएं स्थापित करवाई| ६० वर्ष पूर्व जीर्ण अवस्था में जिन मंदिर, ६० जैन व एक उपाश्रय था| “मेरी गोडवाड़ यात्रा” पुस्तक के अनुसार, ७० वर्ष पहले १३ जैन घर थे तथा मुलनायक श्री चंद्रप्रभुस्वामी प्रतिष्टित थे| पहले यहाँ श्री शांतिनाथजी मुलनायकजी के रूप में प्रतिष्ठित थे, जो शायद जिणोरद्वार के समय बदल दिए गए| यह प्रतिमा आज भी जिन मंदिर में प्रतिष्ठित है| मंदिर में जीर्ण होने से इसका सम्पूर्ण जिणोरद्वार करवाया था|

सोमेसर रेलवे स्टेशन से ३३ की.मी. व नाडोल से १० की.मी. दूर निपल में रावले के पास जिणोरद्वारित श्वेत पाषण से निर्मित सुन्दर व कलात्मक शिखरबद्ध जिन्प्रसाद में चंद्र सम शीतल व आकर्षक मुलनायक श्री चंद्रप्रभुस्वामी की श्वेतवर्णी, पद्मासनस्थ प्रतिमा २३ तिर्थंकरो से अंकित कलात्मक परिकर में प्रतिष्टित है| इसकी प्रतिष्ठा वीर नि.सं. २४८३, शाके १८७७, वि.सं. जिनेन्द्रसूरीजी आ. ठा. के कर कमलों से महामोहत्सव पूर्वक संपन्न हुई| मुलनायक सह श्री सुमतिनाथ, श्री अजितनाथादी जिनबिंबो, यक्ष-यक्षिणी प्रतिमाएं स्थापित की गई| श्री अजितनाथ प्रभु की अंजनशलाका प्रतिष्ठा वि.सं. २००७, जेठ सुदी ५ की हुई है| यह प्रतिमा कहीं से लाकर यहाँ विराजमान की गयी है| प्रतिवर्ष ध्वजा श्री बस्तीमलजी प्रेमचंदजी कुंदनमलजी चतुर बोराणा परिवार चढाते है|

पुन: वीर नि.सं. २५३७, शाके १९३२, वि.सं. २०३७, वैशाख सुदी ९, गुरूवार, दी. १२ मई, २०११ को आ. श्री पद्मसूरीजी आ. ठा. १४ के वरद हस्ते अधिष्ठायकदेव श्री नाकोड़ा भैरवदेव, श्री मणिभद्रवीरदेव , राजेश्वरी श्री पद्मावती माता और श्री महालक्ष्मी माता की नूतन प्रतिमाओं को, नवनिर्मित देहरियों में पंचाहिंका महामोहत्सवपूर्वक प्रतिष्टित किया गया|

श्री जैन नवयुवक मंडल, निपल , मुंबई श्री संघ की मुख्य सहयोगी संस्था है| गत ६० वर्षों में प्रथम बार यहां मुनि श्री तरुणरत्न विजयजी म.सा. व सा. श्री तत्वशीलाश्रीजी आ. ठा. ३ का, चातुर्मास ठाट-बाट से संपन्न हुआ| उपरोक्त गुरु भगवंतों की निश्रा में, बोराणा परिवार द्वारा “निपल जैनम” पता निर्देशिका का सुन्दर प्रकाशन व विमोचन संपन्न हुआ|

पू.मु.श्री दानविजयजी म.सा. का वि.सं. २००६, वैशाख वदी ८, ई सन १९५० को यहां स्वर्गवास हुआ| आपश्री का जन्म चांदराई में हुआ था, जबकि दीक्षा दादी में हुई थी|अग्नि संस्कार स्थल पर गुरु छत्री का निर्माण हुआ है| जैनों के कुल ४४ घर व करीबबन २५० की जनसंख्या है|गांव की कुल आबादी ६००० के करीब है|यहाँ सरकारी और आयुर्वेदिक अस्पताल के अलावा १०वि तक स्कूल, टेलीफोन एक्सचेंज, श्री महादेवजी, हनुमानजी, चारभुजाजी, ठाकुरजी ,श्री शीतलमाता मंदिर व स्वामी श्री दीपनारायण का आश्रम है|