Kot Balian

कोट बालीयान

 

वीर प्रसूता राजस्थान के पाली जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर स्थित, “गेटवे ऑफ़ गोडवाड़” के नाम से प्रसीद्ध फालना रेलवे स्टेशन से वायाबाली १२ की मी. दूर, राजय राजमार्ग क्र. १६ पर स्थित है प्राचीन नगर “कोट बालियान” |

गोडवाड़ शेत्र में विशाल अरावली पर्वतमाला की गोड में बसा, कोट-बालीयान ग़ाव रमणीय तो है ही, एतिहासिक भी है| कींवदंती के अनुसार “बालिया राजपूतों” की बहुलता के कारण इसका नाम “कोट बालियान” प्रचलित है|

ग़ाव के मध्य भाग में प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ प्रभु का श्वेत आरस पत्थर से निर्मित भव्य-दीव्य जिनालय में प्रतिष्ठित मुलनायक श्री आदिनाथ प्रभु, श्री सुपार्श्वनाथ प्रभु एवं श्री अनंतनाथ स्वामी की प्रतिमाओं पर, वि.सं. १२३०-३५ का उल्लेख है| जिससे इन प्रतिमाओं की प्राचीनता ८४० वर्ष की पता चलती है| जिणोरद्वार के करीब  ४८ वर्ष पूर्व, श्री मूलचंदजी गोमाजी कोठारी परिवार ने यह जिनालय श्री जैन संघ कोट बालीयान को समर्पित किया|

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“जैन तीर्थ सर्वसंग्रह” ग्रंथ के अनुसार, श्री संघ ने शिखरबाढ़ जिनालय का निर्माण करवाकर वि.सं. १९५१ में मुलनायक श्री आदिनाथ प्रभु की प्रतिमा सह पाषण की ७ व धातु की ३ प्रतिमाए प्रतिष्ठित करवाई| पूर्व में यहां १७५५ जैन, एक उपाश्रय व एक धर्मशाळा थी|

वि.सं. १९५१, माघ शु. ५ गुरूवार को, वरकाना तीर्थ पर भट्टारक श्री राज्सुरीजी ने ६०० जिनबिंबो की अंजनशलाका प्रतिष्ठा करवाई हुई थी| गोडवाड़ में वरकाना के आसपास के अनेक गावो के प्रतिमाओं की अंजनशलाका प्रतिष्ठा हुई थी| संवत् से जान पड़ता है की संभवत: इनकी भी अंजनशलाका प्रतिष्ठा वि.सं. १९५१ में वारकाणा में हीं हुई हो|

पू. श्री आ. यतिंद्रसूरीजी रचित “मेरा गोडवाड़ यात्रा” पुस्तक के अनुसार, ७० वर्ष पूर्व यहां एक जिनमंदिर में मुलनायक श्री शांतिनाथ प्रभु प्रतिष्टित थे तथा एक उपाश्रय, एक धर्मशाला और ३५ जैनों के घर आबाद थे| यहां पर मुलनायक के नाम में फर्क नजर आता है|

कालांतार में श्री संघ के पूर्वजो ने अथक परिश्रम से तत्कालीन जिनालय को भव्य रूप प्रदान करने हेतु इसका संपूर्ण जिणोरद्वारा करवाया| विशाल आरस पत्थर से निर्मित शिखरबद्ध, कलात्मक जिनप्रसाद में, श्वेतवर्णी, पद्मासनस्थ श्री आदेश्वर प्रभु आदि जिनबिंबो का आ. श्री जिनेंद्रसूरीजी प्रदत मुहर्त एवं उनकी निश्रा में वि.सं. २०२२ माघ शुक्ल १० को जिनालय में प्रवेश संपन्न हुआ|

पुन: वीर नि. सं. २४९३, शाके १८८८, वि.सं. २०२३, वैशाख सुदी ३, अक्षय तृतीय, शुक्रवार, दी. १२.५.१९६७ के शुभ दिन, राजयोगादि समलंकृत शुभ लग्नांश में पू. विधानुरागी सौजन्यमूर्ति जैनाचार्य श्री जिनेंद्रसूरीजी, न्या. का. काव्यतीर्थ पू. मुनि श्री पूर्णनंदविजयजी म. सा. आ. ठा. की पावन निश्रा में उन्ही के वरद हस्ते प्रतिष्ठा तथा स्वर्ण दंड, ध्वजा, कलशारोहणादी, दशाहिनका मोहत्सव पूर्वक भावोल्लास से संपन्न हुआ, जिसके पश्चात ग़ाव की प्रगति एवं उन्नति ने गति पकड़ी| प्रतिवर्ष आखातीज को, शा. अनराजजी धुलाजी कोठारी परिवार ध्वजा चढाते है| वर्तमान में १५० जैन परिवारों की घर हौती है| जिनकी जनसंख्या करीब ९५० है| आज कोट-बालियान जैन समाज का हर छठा व्यक्ति स्नातक है| अधिसंखय जैन परिवार, मुंबई,पुणे एवं हुबली में बसे हुए है|

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वीर नि.सं. २५१८, शाके १९१३, वि.सं. २०४८, वैशाख सुदी ३,मई १९९२ को, जिणोरद्वार के पश्चात प्रतिष्ठा का रजत जअंती मोहत्सव हर्षोलास से संपन्न हुआ| नगर से चार अनमोल रत्नों ने दीक्षा अंगीकार करके, जैन शासन में ग़ाव व स्वयम के कूल का नाम रोशन किया| स्व. सा. श्रे हस्तिश्रीजी, स्व. सा. श्री पुणयरेखाश्रीजी, सा. श्री कल्परत्नाश्रीजी और सा. श्री मोक्षमालाश्रीजी ने प्रभु महावीर के मोक्ष मार्ग को अपनाया|

प्रतिष्ठा शिरोमणि, गच्छाधिपति आ. श्री पद्मसूरीजी आ. ठा. १३ की पावन निश्रा में, अधिष्ठायकदेव श्री नाकोडा भैरव एवं माता पद्मावती देवी प्रतिमा की प्रतिष्ठा और तपागच्छ अधिष्ठायकदेव श्री मणिभद्रवीर एवं शासनदेवी की वर्तमान प्रतिमाजी को स्थानापन्न कर, नए स्थान पर महामोहत्सव पूर्वक, वीर नि.सं. २५३७, शाके १९३२, वि.सं. २०६७, वैशाख वदी १२, शुक्रवार, दी. २८ अप्रैल २०११ को प्रतिष्ठा संपन्न हुई|

कोट बालीयान : ग्राम पंचायत कोट बालियान में माधयमिक विधालय, सरकारी व प्रायवेट अस्पताल, पोस्ट, दूरसंचार, आदि साड़ी सुविधाए है|  १२ की.मी. दूर फालना और १४ की.मी. दूर सादड़ी से साड़ी जरूरतों पुरी होती है| ग़ाव में श्री कोटेश्वर महादेवजी, चारभुजाजी, रामदेवजी, पुलोंश्वर्जी, रानी महाराज एवं हनुमानजी के हिन्दू मंदिर है|