गोडवाड़ की बावडिया

गोडवाड़ की बावडिया / Godwad ki Bavdia

गोडवाड़ की धरोहर, जीवनदाईनी जल स्तोत्र, अस्तित्व खोती जा रही बावडिया

 

               तब : यह सीढ़ीनुमा विशाल कुआ जिसका निर्माण राजा-महाराजओ और सेठ-साहुकारो ने स्थानीय प्रजा को रोजगार दिलाने व अकाल से निजात पाने के लिए करवाया था| इसमें पत्थरों का उपयोग कर इसकी मजबूती बनाए राखी, जो आज भी जीवित है| सीढ़ीनुमा होने से पनीहारियो को पानी भरने के लिए सहूलियत होती थी| इस बावड़ी के ताल पर रहा पानी कुए के द्वारा कृषि करने के लिए उपयोग में आ जाता था| इसके साथ अवाडा (अवाला-जलसंग्रह स्थान) भी बनाया जाता था, ताकि पशुओ के लिए पीने का पानी उपलब्ध हो सके| इसके परिसर में बनाए गए चबूतरे पर पत्थरों में खड्डे बनाए जाते थे, उसमे जल भरा जाता था| वह पानी पक्षियो के लिए उपयोग में आता था| इस प्रकार बहुउपयोगी साधान प्रजा के हितो की पूर्ति भी करता है| हमारे पूर्वजो की सोच बहुत ही दूरदर्शी थी – नमन है उनको| यह बाव्डियो तीन व् अधीक मंजिलो की भी बनती थी|

गावों में बावडियो की विधमानता के निम्न उदाहरण प्रस्तुत है –

रात महावीरजी

Bavdi of Rata Mahavir - Godwad ki Bavdia

राता महावीरजी

-दोहा- “आठ कुआं नव बावड़ी, सोलासो पाणीहार” इस ध्वंस नगरी में वर्तमान में नदी के किनारे एक वाव है|

भाटुन्द : खीमज माताजी की वाव, कांरली वाव, गाव के मध्य बैंक के पीछे|

बीजोवा : तालाब के पास, जुना खेड़ा शीतला माता मंदिर के पास |

सादड़ी : ठाकुर ताराचंदजी की बावड़ी व् अन्य ४ बावडिया|

नारलाई : अंदरवाव, वीरावाव, भिंदावाव, खारीवाव, अम्बावाव, खारडिया वाव|

खुडाला : गाव के मध्य जैन धर्मशाला के पास |

नाडोल :

Bavdi of Nadol - Godwad ki Bavdia

रानीगांव-नाड़ोल

रानिवाव, कथवारीवाव, धुआवाव, मूंगवाव, देवकीवाव, कमोदनिवाव, शोभावाव, खाखरीवाव, रखेश्वरकुंड, सुखबाई वाव, जैन अम्बावाव, बारिवाव, आशापुरा लाखणवाव (यह वि.सं. १०३९ में निर्मित है)|

सेवाड़ी – दोहा :

Bavdi of Sewadi - Godwad ki Bavdia

जैतलवाँव-सेवाड़ी

सेवाड़ी सौ बावड़ी, रूड़ी जैतलवाव, खाणडी पीपर पारणे हीचे क्षेतल पार|

लेखक ने स्वयम ४०-४५ वर्ष पूर्व पटवारीजी हल्का सेवाड़ी से व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त की थी, उसके अनुसार ६४ नेमवाव, देदावा आदि| वर्तमान में जैतलवाव, भादरवा, उजलावा, रेलवा, उभालावा. रोकावा, धनोवा, पापीयावा, होंगावा, नेमवाव,देदावा आदि| वर्तमान में जैतलवाव विधमान है, जिसका रूप भी विकृत होता जा रहा है|

Bavdi of Pawa - Godwad ki Bavdia

पावा

मनुष्य की प्रथम आवश्यकता अन्न है(अन्न ब्रह्मा) उसके पश्चात जल है| जैसे-अन्न देवता, वाऊ देवता और जल देवता है| भारत के प्राचीन ग्रंथ यजुवेद में – जल हमारी जननी है, जल ही ज्योति है और जल ही जीवनदाई औषधि है, ऐसा उल्लेख है| राजस्थानी लोकगीतों में भी बावड़ियो को याद किया गया है| पणिहारी गीत में – “कने खोदाया कुआं बावड़ी जी रेलो…”

Bavdi of Ghanerao - Godwad ki Bavdia

घानेराव

 

शिल्प रत्नाकार के पंचम रत्न श्लोक नं. १०५ में वर्णित है की जीर्ण हुई बावड़ी, कुआं, तालाब, प्रसाद (मंदिर) आदि के जिणोरद्वार में ८ गुणा पूण्य बताया गया है |यानि मंदिर के समकक्ष बावड़ी को पवित्र माना गया है| भारत के प्रसीद्ध ७ खण्ड को पत्थर से बनी बावड़ी नमूना ” रंकि वाव” पाटन(गुजरात) में स्तिथ है| जहां विश्व के पयर्टक भी देखने आते है|

Bavdi of khimel - Godwad ki Bavdia

खीमेल

               अब : अपना अस्तित्व खोती जा रही यह बावडिया अब ग़ाव के कचरा संग्रह का पात्र बनती जा रही है| अंग्रेजी बबूल व् झाड़ियो का बढ़ना जारी है| यह मानव की स्वार्थवृति पर आंसू बहाकर अपने पुराने वैभव के लौटने का इंतजार कर रही है की कभी तो हमारे लिए कोई भगीरथ अवश्य पैदा होगा |

यदी ग्रामपंचायत/गाववालों में इस धरोहर के प्रति ममता जागे तथा इसकी उपयोगीता को समझे तो नरेगा योजना के तहत इसका उद्धार/ जिणोरद्वार हो सकता है| यह जल संग्रह का स्तोत्र भविष्य में जनमानस के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है, इसमें कोई संदेह नहीं है| जल प्राकृतिक संपदा है|

सरंक्षण करे जल का, उज्वल भविष्य हो कल का