Bankli

History of Bankli (Godwad – Rajasthan)

बांकली गाँव का परिचय

 

पाली जिले के अंतगर्त राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर सुमेरपुर कस्बे से करीब १६ की. मी . की दुरी पर स्तिथ है “बांकली” ग़ाव | इसके बारे में कहा जाता है की इसकी स्थापना संवत् ८९५ में हुई थी |पहले यह ग्राम खेडा देवी शक्तिमाता मंदिर के पास स्तिथ था|

Shree MunisuvratSwami Temple - History of Bankli (Godwad - Rajasthan)

बांकली ग़ाव में मुलनायक श्री मुनिसुव्रत स्वामीजी का मंदिर स्तिथ है|इस मंदिर की प्रतिष्ठा श्रीमद् विजय महेन्द्रसूरीजी आ. ठा. के हस्ते संवत् १९६५ में जेष्ठ सुदी ५, दि. ४ जून १९०८, गुरूवार को ९.२५ बजे शुभ मुहूर्त पर हुई थी |इस दिन से ही अखंड दीपक में काली ज्योति के बदले केसरी ज्योति आज तक निरंतर चालु है |

Mulnayak - History of Bankli (Godwad - Rajasthan)

श्री मुनिसुव्रत स्वामीजी की प्रतिमा संप्रति महाराज के काल की है, जो अंबाजी के करीब इडर नगर से २० की. मी. दुर “मोटा पोसिना” ग़ाव से लाई गई थी |

ग़ाव के प्रवेश के पूर्व ग़ाव की सीमा पर विशाल पेड़ के निचे प्रतिमाजी को विराजमान कीया गया था |इसी विशाल पेड़ के पास का पेचका (कुआं) ,जो वर्षो से सुखा हुआ था, इस घटना के पश्चात आश्चर्यजनक ढंग से पानी से इस कुएं में पर्याप्त पानी रहता है |

इस प्रतिष्ठा के समय श्री नाथू सिंहजी देवड़ा बांकली ग़ाव के अधिपति थे अर्थात श्री देवड़ा के साम्राज्य में ही यह प्रतिष्ठा हुई| इसे आचार्य जिनेन्द्रसूरीश्वर्जी म. सा. की निश्रा प्राप्त थी |

सं. १९६४ के पूर्व मंदिरजी में श्री सुपार्श्वनाथ, श्री चंद्रप्रभुस्वामी एवं श्री पार्श्वनाथ प्रभु की तीन प्रतिमाए विराजमान थी |प्रतिष्ठा के समय आहोर से श्री पार्श्वनाथजी, श्री सुमतिनाथजी व श्रेयासनाथजी तीनो की प्रतिमाए मंगवाई गई, परंतु श्री पार्श्वनाथजी प्रतिमा की दृष्टी ठीक नहीं होने से उनकी जगह ” मोटा पोसिना “ से श्री मुनिसुव्रत स्वामीजी की प्रतिमा मंगवाकर, मुलनायक के रूप में प्रतिष्ठापीत किए गए |उनके दोनों तरफ श्री सुमतिनाथ एवं श्री श्रेयानसनाथ प्रतिष्ठापीत किए गए |

सं. १९९८ में फाल्गुण सुदी ३, बुधवार के दिन नागर रूम के स्थान पर दो देहरियो का निर्माण किया गया, जिसमे एक में श्री चंद्रप्रभु, श्री पद्मप्रभु व श्री महावीर प्रभु के त्रिगड़े और दुसरे में मुलनायक श्री विमलनाथ , श्री संभवनाथ एवं श्री श्रेयानसनाथ त्रिगड़े प्रतिष्ठापीत किए गए |साथ ही नए भोयरे में नूतन शंकेश्वर प्रभु व नूतन मुनिसुव्रत प्रभु के मध्य में श्री केशरीयाजी आदिनाथजी का स्वर्णपट्ट प्रतिष्ठत किया गया |वरुणयक्ष नरदत्ता देवी रंग्मंड़प में एवं गोमुखयक्ष चकेश्वरी देवी छ: चौकी में प्रतिष्ठित है |

प्रदक्षिणा  के गंभारे के पीछे पट्टशाळा में श्री गौतमस्वामी , श्री सुधर्मस्वामी व आ. श्रीमद् नितिसूरीश्वरजी म. सा. की प्रतिमा प्रतिष्ठापित की गई है |इस प्रतिष्ठा को प. पू. आचार्य विजय हर्षसूरीश्वरजी तथा मुनिराज रामविजयजी , मुनि जयानंद विजयजी की निश्रा प्राप्त थी | निकट दीवार पर १३ पट्ट अंकित है |

बांकली ग़ाव की विशेषता है की यह प. पू. आचार्यदेव श्रीमद् विजय सुधांशुसूरीजी म. सा. प. पू. आचार्यदेव श्रीमद् विजय विश्वचंद्रसूरीश्वरजी म. सा. ,प. पू. मुनिप्रवर श्रीमद् सुव्रतविजयजी म. सा. एवं प. पू. पंन्यास भद्रानंदविजयजी , गणिवर्य,  के साथ-साथ १० श्रमणिवृंदो की जन्मस्थली है |अभी हाल ही में सन २००७ में दि. २०.१२.२००६ से ३१.१२.२००७ के दरम्यान , श्री मंदिरजी का शताब्दी महामोहत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया |इस मोहत्सव को बांकली रत्न प. पू. पंन्यास प्रवर भद्रानंदविजयजी ने “पंन्यास” की निश्रा प्राप्त की |

ग़ाव में दो विशाल उपश्रय है|वर्धमान आयम्बिल खाता एवं भोजनशाला की सुविधा उपलब्ध है| जैन धर्मशाला, जैन भवन एवं अतिथि भवन जैसी वास्तुए निवास हेतु उपलब्ध है |राजकीय उच्च प्राथमिक कनया पाठशाला , राजकीय उच्च माध्यमिक विधालय , प्राथमिक विधालय के साथ-साथ पशु चिकित्सालय एवं महावीर गौशाला आदि सभी संस्थाए हमारे जैन साधार्मिक भाईयों के सहयोग से निर्मित है| 


 

Shree Sudhaanshu Maharaj - History of Bankli (Godwad - Rajasthan)

पू. आ. श्री सुधांशुसूरीजी  (बांकली)

Acharya Shree Vishwchandra Marasaheb - History of Bankli (Godwad - Rajasthan)

पू. आ. श्री विश्वचंद्रसूरीजी (बांकली)