Shree Abhinandan Swami Jain Temple,Sriperumbudur (Chennai)

Shree Abhinandan Swami Jain Temple,Sriperumbudur (Chennai)

 

 

श्री अभिनंदनस्वामी जैन मंदिर, श्रीपेरम्बदूर

 

यहाँ मुलनायक वर्तमान चौबीसी के चौथे तीर्थंकर परमात्मा अरिहंत देव श्री अभिनन्दन स्वामी विराजमान है | प्रभुजी के भव्य शिखरबद्ध काँच की सुशोभा से श्रुंगारित इस जिनालय में अभिनंदन स्वामी की नयनरम्य प्रतिमा शोभायमान है| प्रभुजी की मुखमुद्रा पर मनमोहक शाश्वत स्मित निरंतर चमक रही है, इस स्मित के जादू से दर्शनार्थी के ह्रदय में अपूर्व प्रसन्नता का संचार होता है| श्वेत पाषण के ३१ इंच देह प्रमाण युक्त यह जिनबिंब कलात्मक परिकर से श्रृंगारित है| प्रभुजी की अलौकिक दिव्य मुखमुद्रा निहारकर दर्शक आध्यात्म भूमि में रमण करने लगता है| मुलनायक परमात्मा के दायीं ओर श्री शांतिनाथ भगवान की श्वेत वर्णीय २१ इंच कायायुक्त सौन्दर्य परिपूरित प्रतिमा पद्मासन में विराजमान है| प्रभुजी के बाई ओर श्वेत पाषण से निर्मित २१ इंच कायायुक्त तेजस्वी प्रकाशपुंज परमात्मा पार्श्व प्रभु पद्मासन मुद्रा में शोभायमान है| प्रभुजी के पीछे उकेरित महाप्रभावशाली १४ स्वप्न गंभारे के सौन्दर्य को शतगुणित करते है|

मुल गंभारे के बाहर सुन्दर कलात्मक शिल्पकला से शोभित रंगमंडप में दायी-बायीं ओर क्रमश: श्री मल्लिनाथ परमात्मा तथा श्री नेमिनाथ परमात्मा की श्वेत पाषण से निर्मित प्रतिमा आरूढ़ है| इन् प्रतिमाजी की उंचाई 9 नच देहप्रमाणयुक्त है|

रंगमंडप के गोखलों में श्री मणिभद्रवीर देव, श्री नाकोड़ा भैरव देव , श्री पद्मावती देवी और श्री चकेश्वरी देवी की चित्तहर्षित प्रतिमाएं विराजमान है| रंगमंडप की छत,स्तंभ, जिनालय के द्वार तोरण, शिखर पर अद्वितीय शिल्पकला की शेष्ठ प्रभावकता दृष्टीगोचर होती है| प्रकृति की शांत-सुरम्य गोद में निर्मित्याह जिनालय सहज ही दर्शक को आध्यात्म की उच्च भूमि तक पहुंचा देता है| अनेकता में एकता इस देवालय में सभी सम्प्रदाय के लोग दर्शन-पूजन का लाभ लेते है|

शिल्पशास्त्रनुरूप निर्मित इस देवविमान सहश जिनालय की प्रतिष्ठा वि.सं. २०६५, आषाढ़ सुदी १०, दिनांक १२.७.२००८, शनिवार के पावन दिवस में प.पू. आचार्य देव श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरीश्वरजी म.सा. के कर कमलों द्वारा सुसंपन्न हुई|

इस जिनालय के पृष्ठ भाग में छोटासा परन्तु एक परम शान्तियुक्त साताकारी उपाश्रय भी है| पधारने वाले साधकों के लिए निर्मित इस उपाश्रय में समुचित उत्तम व्यवस्था उपलब्ध है| जहाँ धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन यदा-कदा होते रहते है|