Shree Aadinath Jain Mandir – Triplicane (Chennai)

श्री आदिनाथ जैन मंदिर – ट्रिपलीकेन

 

चेन्नई सेंट्रल से ३.५. की.मी. दुरी पर है शहर का चर्चित स्थान ट्रिपलीकेन, यहाँ मुस्लिम एवं ब्राह्मण समुदाय के बहुतायत में आवास स्थान तथा व्यापारिक संस्थान स्तिथ है| यहाँ के मुस्लिम,हिन्दू,जैन सभी धर्मों की सांप्रदायिक एकता काबिले तारीफ़ है, सहारनीय है| यहाँ अति प्राचीन पार्थसारथी का प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है, पास ही ख्यातिप्राप्त राघवेन्द्र मंदिर तथा पुरानी चर्च भी है|

यहाँ युगादिदेव प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ परमात्मा का जिनालय स्थित है| तल खण्ड से शिखर तक सम्पूर्ण जिनालय श्वेत पाषण से निर्मित है| मूल गम्भारे में आदि तीर्थंकर श्री ऋषभदेव भगवान की शुभ श्वेत वर्णीय प्रतिमा पद्मासनस्थ विराजमान है| २५ इंच देह प्रमाणयुक्त देवाधिदेव की दिव्यकांति आत्मा को आकर्षित करती है| तेजस्वी पुंज सैम ये परमात्मा अखूट पूण्य के भंडार जैसे शोभायमान है| इस आहूलादक मनोहारी परमात्मा की भक्ति आत्म वैभव को उद्घाटित करती है| ये तीन भुवन के भुवनपति अत्यंत सुन्दर अष्टमहाप्रातिहार्ययुक्त कलात्मक परिकर से श्रुंगारित है|

मूलगंभारे में प्रथम तीर्थंकर मुलनायकजी के दायी ओर श्री महावीर स्वामी की श्वेतवर्णीय, २५ इंच कायायुक्त, पद्मासनस्थ प्रतिमा विराजमान है| प्रभुजी के मस्तक के पीछे आभा मण्डल का चक्र तथा पीठिका एंटी मनोहारी है| मुलनायकजी के बायीं ओर हुबहू चक्र तथा पीठिका से शृंगारित श्री शांतिनाथ भगवान श्वेतरंगी २५ इंच देहप्रमाण युक्त विराजमान है| अरिहंत देव के ये वीतरागी जिनबिंब संसार के सारे विषादों को भुलाने का सामर्थ्य रखते है|

मूल गंभारे के बाहर ५०० वर्ग फीट मापवाले सुन्दर रंगमंडप के दायें-बायें श्री मुनिसुव्रतस्वामी तथा श्री चन्द्र[प्रभु स्वामी की पद्मासनस्थ प्रतिमाएं शोभायमान है| रंगमंड़प में श्री गोमुखयक्ष, श्री मणिभद्रवीरजी, श्री चकेश्वरी देवी एवं श्री सरस्वती देवी गोखलों में विराजमान है| शिल्पशासननुरूप निर्मित इस द्विमंजिले जिनालय के उपरी दुसरे खण्ड के गंभारे में श्यामवर्णी श्री पार्शवनाथ परमात्मा की १९ इंच कायायुक्त मनोहारी प्रतिमा विराजमान है| गम्भारे में श्वेत वर्णीय श्री आदेश्वर दादा की १९ इंच कायायुक्त चिताकर्षक प्रतिमा पद्मासन्स्थ विराजमान है| जिनालय में श्री आदिनाथ भगवान की पावन चरण पादुकाएं रायण वृक्ष के नीचे प्रतिष्ठित है| श्री पार्श्व पद्मावती एवं श्री नाकोड़ा भैरवजी दये-बायें गोखले में विराजमान है|

शुभ चांदनी से जगमग करते इस जिनालय की प्रतिष्ठा वि.सं. २०३६, फाल्गुन वद ७, दिनांक ८-२-१९८०, शनिवार के शुभ दिन प.पू. आचार्य देव विजय नविनसुरिश्वर्जी म.सा. एवं प.पू. आचार्य श्रीमद् विजय विक्रमसुरिश्वर्जी म.सा. के कर-कमलों से संपन्न हुई|

 

श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ

नं. ३, बी.वी. नायकन स्ट्रीट, ट्रिपलीकेन, चेन्नई – ६०० ००५

संपर्क : २८४४ ४२४३ / ९४४४७ ७७२९९