Aa. Shree Yashovarmsurishwarji Marasahebji

Aa. Shree Yashovarmsurishwarji Marasahebji

 

श्री जिनशासन के सौरभ लाब्धिसमुदाय के गौरव अवं विक्रमगुरु के वैभव समतानिधि

प. पू. आ. दे. श्री यशोवर्मसूरीश्वर्जी म.सा.

yashovarm m.

जन्म : फाल्गुन सुदी १३, वि.सं. २००९ , वीर सं. २४१९ ,

शाके १८७४ , ता.२६/२/१९५३ , उमरगाव (गुजरात)

जन्म नाम : दिलीप , पिता : श्रीमान बाबुलालजी सोलंकी , खुडाला/नवसारी (गुजरात)

माता : श्रीमती हीराबेन बाबुलालजी सोलंकी – साध्वीश्री पू. विनितमालाश्रीजी (माताजी महाराज)

बहन : ज्योसनाबेन-साध्विश्री विपुलमालाश्रीजी (बेन म.सा.)

दीक्षा : पौष वदी १० (भ. पार्श्वनाथजी का जन्म कल्यानक दिवस) वि.सं २०२१, वीर सं २४९०, शाके १८८५ , ता. २७/१/१९६४ मुंबई , भायखला.

दिक्षादाता : तिर्थप्रभावक नित्य भक्तामर सोत्र पाठक प.पू. गुरुदेवश्री विक्रमसुरिश्वर्जी महाराज.

गणी पद : जेष्ठ वदी ११, वि.सं. २०४४, वीर सं. २५१७, शाके १०१२ , रविवार, ता. २१/६/८७ , बोरडी (गुजरात)

पंन्यास पद : वैशाख सुदी २, वि.सं. २०४५ , वीर सं. २५१४ , शाके १९०९ , उमरग़ाव

आचार्य पद : वैशाख सुदी ६, वि.सं. २०४८ , वीर सं. २५१७ , शाके १९१२ , ता. १९/५/९१ ,

स्थान : दादर लाब्दिसुरी ज्ञान मंदिर , मुंबई  शिष्य-प्रशिष्य परिवार : साधी भगवंत – २१ , साध्वीजी -८२भाषा प्रभुत्व : गुजराती, हिंदी, मराठी , संस्कृत , प्राकृत. ज्ञानाभ्यास : न्याय , व्याकरण , काव्यकोष , आगमशास्त्र.

साहित्य : अनेक छंदबद्ध , आकारबद्ध श्लोक , प्रबंध , प्राय विश्व में अजूबा स्वरुप सम्मेतशिखर पर्वताकारबद्ध काव्य रचना ,

विशेषता : ११ वर्ष की बाल्यावस्था में….दीक्षित बन ६ दिन में , दश वैकालिक सूत्र कंठस्थ करने की अदभूत शक्ति