Aa. Shree Vichshransuriji Marasahebji

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लापोद रत्न पू.आ. श्री विचश्रणसूरीजी म.सा.

“गुरुकुलवास के अदभूत आदर्श”

 

जन्म : वीर नि. सं. २४५८ , शाके १८५३ , वि.सं. १९८८ , श्रावण वदी ८ (जन्माष्टमी के दिन) दी. अगस्त १९३२

स्थान : लापोद , जिला-पाली , राजस्थान ,

पिता : श्री वनेचंदजी बोहरा , जन्मनाम : वीरचंदजी , ससुराल : ढोला निवासी , श्री चुन्निलालजी जुहारमलजी

भाई : श्री संतोषचंदजी , भतीज : बाबुलालजी और उनके दोनों पुत्र श्री शंकेश्वर तीर्थ में स्थाई प्राचीन भोजनशाला में नौकरी करते है | एक बेटा हाथगाड़ी पर व्यापार करता है|

दीक्षा : वीर नि. सं. २४७५ शाके : १८७० वि.सं. २००५ वैशाख सुदी ५ दी. मई १९४९

स्थान : नाशिक (महाराष्ट्र) दीक्षा प्रदाता : श्री रामचंद्रसूरीजी समुदायवर्ती आ. श्री मुक्तिचंद्रसूरीजी (तब मुनिवर्य थे) के वरद हस्ते दीक्षा ग्रहण की और मु. श्री विचश्रण विजयजी नाम पाया | गणी और पंन्यास पद से विभूषित मु. श्री वीर नि.सं. २५१३ शाके १९०८ , वि.सं. २०४३ के पौष वदी ६ दी. दिसंबर १९८७ को मुंबई के श्री पल नगर में पू. गच्छाधिपति श्री रामचंद्रसूरीजी के वरद हस्ते आचार्य पद से अलंकृत हुए| आप श्री के हस्ते पनवेल , पुणे , वडनगर में प्रतिष्ठाए एवं उपधान व् दीक्षा मोहत्सव हुए है| ऐसे महँ गुरूवार को कोटिश: वंदन |