Aa. Shree Pradhotansuriji Marasahebji

Aa. Shree Pradhotansuriji Marasahebji

 

 

आध्यात्मिक आ. श्री प्रधोतनसुरीजी म.सा.

 

जन्म : वीर नि.सं. २४४१, शाके १८३६ , ई. सन १९७१ , जेठ सु. ११

जन्म स्थल : बीसलपुर , जन्म नाम : प्रेमचंद,

पिता : मगनलालजी (मगनजी) , माता : भीकीबाई

दीक्षा पूर्व आप गांधीवादी थे| प्रथम आप श्री आ. वल्लभसूरीजी के प्रशंसक बने| बाद में आ. श्री रामचंद्रसूरीजी एवं आ. श्री कनकचंद्रसूरीजी के संपर्क में आए|

आपश्री की शादीशुदा थे| पत्नी का नाम था चुनिबेन| रेमिबन नामकी बहन थी| पत्नी और बहन दोनों को परिवार की आज्ञा के बिना, आपश्री ने सांवरकुंडला (गुजरात) में दीक्षा दिलवाई| पत्नी चुनीबेन सा. श्री कीर्तिप्रभाश्रीजी और बहन बनी सा. श्री हेमप्रभाश्रीजी | दीक्षा की तिथि थी वि.सं. १९९८ फाल्गुन सुदी ३, ई. सन १९४२

माता भिकिबाई की दीक्षा : वि.सं. २००७-फाल्गुन मॉस

नामकरण : सा. श्री भक्तिश्रीजी गुरुणी : सा. श्री सुशीलश्रीजी शिष्या: सा. श्री ललितप्रभाश्रीजी (लहेरो म.सा.)

पत्नी और बहन की दीक्षा (सं. १९९८ , फाल्गुन सु. ३) के तीन महीने बाद आपकी दीक्षा |

आपश्री का गोद लिया पुत्र : श्री विमलचंद प्रेमचंदजी विशाल गोत्र परिवार

दीक्षा : वीर नि.सं. २४६८ , शाके १८६३ , ई. सन १९४२ , वि.सं. १९९८ , वैशाख सुदी ५,

स्थान : वानिगाव (नाशिक-महाराष्ट्र), प्रदाता : पु. पंणयास श्री भद्रंकर विजयजी गणीने दीक्षा देकर अपने शिष्य मु. श्री चरणविजयजी के शिष्य घोषित किए|

नामकरण : मु. श्री प्रधोतन विजयजी (इसी मुहर्त में मु. श्री कुंदकुंद विजयजी की दीक्षा हुई|)

सं. २०३० में लुणावा में वर्धमान तप की १००वि ओली पूर्ण की| शासन प्रभावक उजवणी हुई|

गणी पद : वि.सं. २०३३ , माह सुदी ७ , स्थान : लुणावा , पंणयास पद : वि.सं. २०३४ , वैशाख सुदी ५ , स्थान : पिण्डवाडा

आचार्य : वीर नि.सं. २५०८ , शाके २९०३ , ई. सन १९८२, विक्रम संवत् २०३८ , महा वदी ६ को आचार्य पद से अलंकृत

स्थल : ढोढर गाव , जिला-जावरा , म.प्र., प्रदाता : आ. श्री कलापूर्णसूरीजी म.सा.

स्वर्गवास : वि.सं. २०५० , पौष वदी २, स्थान : पोरबंदर (गुजरात)

अग्नि संस्कार स्थल पर छत्री का निर्माण व् प्रतिमा की स्थापना हुई|