Aa. Shree Hrinkaarsuriji Marasahebji

Aa. Shree Hrinkaarsuriji Marasahebji

 

 

तपसम्राट सादड़ीरत्न आ. श्री ह्रींकारसूरीजी म.सा.

 

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जन्म : वीर नि.सं. २४५३ , शाके १८५१ , वि.सं. १९८६ , असोज कृ. ८ , अक्तूबर १९३०,

जन्म स्थान :  सादड़ी (जिला-पाली) , जन्म नाम : श्री फतेहचंदजी बाफना , माता : पानिबाई ,

पिता : श्री करमचंदजी बाफना , बड़े भाई : श्री हमीरचंदजी बाफना , पढ़ाई : आत्मानंद जैन स्कूल , सादड़ी

गुरु संपर्क : सं. २००४ में, पंणयास श्री पूर्णानंद विजयजी | आपश्री ने अपने  पिताश्रम को सं २००६ , जेष्ठ शु. ६ को बाली प्रतिष्ठा मोहत्सव के अवसर पर दीक्षा लेने का निर्णय सूनाया | बड़े भाई हमीरमलजी ने, जो की रंगून में थे, वहा से आकर इन्हें समझाया और दीक्षा सादड़ी में तय की |

दीक्षा : सादड़ी न्यातिनोहरे में, वीर नि.सं. २४७६ , शाके १८७१ , वि.सं. २००६ , जेष्ठ शुक्ल १३ , जून १९५० को दीक्षा संपन्न | नामकरण : मु. श्री ह्रींकारविजयजी म.सा.

प्रदाता गुरु : आ. श्री वल्लभसूरीजी म.सा. , पू. पंनयास श्री पूर्णानंद विजयजी

विशेष : मु. श्री ह्रींकार विजयजी के ४२ वर्षो (सन १९५० से १९९२) की दीक्षा में २२ वर्ष तपस्या आराधना में व्यतित| २२ वर्षो तक अन्न ग्रहण नहीं किया | महान तपस्वी की तरह ५५० टेली , ११५० बेले , १२३-३३ अट्ठाई तप पूर्ण किए| महीने में गयारह उपवास तो करते ही थे |

आचार्य पद : वीर नि.सं. २४९१ , शाके १८८६ , वि.सं २०२१ , ई. सन १९६५ , स्थान : श्री पुडल तीर्थ (केशरवाडी) चेन्नई ,  प्रभु श्री आदिनाथ की छात्रछाया में |

प्रदाता : गुरु श्री आ. पूर्णानंदसूरीजी म.सा.

स्वर्गवास : श्री परासली तीर्थ (म.प्र.) , यहां स्थानकवासी चेले ने सोते हुए आ. श्री के सीर पर पत्थर मार दिया , फलस्वरूप वीर नि.सं. २५१८ , शाके १९१३ , वि.सं. २०४८ , वैशाख मॉस , दी. २० अप्रैल १९९२ को वे कालधर्म हो गए | करीब ५ करोड़ की लागत से श्री नागेश्वर तीर्थ पर “ह्रींकार धाम” बना है| ऐसे तपसम्राट गुरुदेवश्री के चरणों में कोटिश: वंदन|