Aa. Shree Chandrodaysurishwarji Marasahebji

Aa. Shree Chandrodaysurishwarji Marasahebji

 

 

पू. आ. श्री चंद्रोदयसूरीश्वरजी

स्वाध्यायमग्न , संयमनिष्ठ , प्रशांतमूर्ति

 

जन्म : वीर नि.सं. २४४२ , शाके १८३७ , वि.सं. १९७२, असोज सुदी १४, सितंबर १९१६

जन्म स्थान : खिवांदी (राजस्थान) जन्म स्थान : चंदनमल

माता : गुलाबबाई पिता : श्री जेठाजी मेराजी व्यापार – नलबाजार , मुंबई

पत्नी : जतनोबेन पुत्र : कुंदनमल (बाद में आ. श्री कनकशेखरसूरीजी)

पुत्री : १. शांताकुमारी , २. वासंती (जन्म सं. १९९४ , खिवांदी में) – सा. श्री दिनकरश्रीजी , ३. सुंदरी – सा. श्री दिनमणिश्रीजी

सं. २००० में दो पुत्रीयो शांताकुमारी व् वासंतीकुमारी के साथ अहमदाबाद में दीक्षा की तैयारी , वरघोडा निकला, पर परिवार द्वारा कोर्ट से मनाही का हुक्म के कारण दीक्षा में रुकावट, बाद में बड़ी पुत्री शान्ताकुमारी की शादी , वि.सं. २००५, कार्तिक सुदी १३ को शांतलपुर में वासंती पुत्री की दीक्षा करवाई – नामकरण सा. श्री दिनकरश्रीजी , गुरुणी-सा. श्री निर्मलाश्रीजी , तीसरी पुत्री सुंदरी को दीक्षा – वि. सं. २०११ , मगसर सुदी ६ को आ. श्री कनकचन्द्रसूरीजी के हस्ते दीक्षा – नामकरण श्री दिनमणिश्रीजी

स्वम के साथ पुत्र की दीक्षा : श्री चंदनमलजी ने पुत्र कुंदनमल के साथ दीक्षा वीर नि.सं. २४८१ , शाके १८७६ , वि.सं. २०११, जेठ सुदी ५, जून १९५५ स्थान : कलकत्ता (प. बंगाल)

प्रदाता : गच्छाधिपति प. पू. आ. श्री रामचंद्रसूरीश्वर्जी

नामकरण : श्री चंदनमलजी – मु. श्री कनकध्वजविजयजी बनकर गु. आचार्य श्री शिष्यरूप में घोषित हुए| वि.सं. २०३२ तपोत्सव में ” छट से वर्षीतप” किया|

वि.सं. २०४२ में “गणीपद” तथा वि.सं. २०४४ में “पंनयास पद“

“आचार्य पद” – वीर नि.सं. २५१७ , शाके १९१२, वि.सं. २०४७ , वैशाख सुदी ६ , मई १९९१ को मुंबई के भुलेश्वर में नमस्कार महामंत्र के तीसरे पद यानि आचार्य पद पर आरूढ़ होकर आ. श्री चंद्रोदयसूरीश्वर्जी नाम से प्रसिद्ध हुए|

वि.सं. २०६० का (संयम सुवर्ण वर्ष) चातुर्मास (पुत्र) आ. श्री कनकशेखरसूरीजी व् (पुत्री) सा. श्री दिनमणी श्रीजी आ. ठा. ४ के साथ जन्मभूमि पर किया|

स्वर्गवास : सं. २०६४ , पौष वदी १