Shree Parshvanath Bhagwan

श्री पार्श्वनाथ भगवान

 

23

23. Shree Parshvanathji Bhagwan

 

पार्श्वनाथ : तेवीसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के पिता का नाम राजा अश्वसेन तथा माता का नाम वामा था।

आपका जन्म पौष कृष्ण पक्ष की दशमी को वाराणसी (काशी) में हुआ था।

चैत्र कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आपने दीक्षा ग्रहण की तथा चैत्र कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ही कैवल्य की प्राप्ति हुई।

श्रावण शुक्ल की अष्टमी को सम्मेद शिखर पर निर्वाण प्राप्त हुआ।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार आपका प्रतीक चिह्न-सर्प, चैत्यवृक्ष- धव, यक्ष- मातंग, यक्षिणी-कुष्माडी।


प्रभु के नाम करण में गर्भित रहस्य

पार्श्वनाथ : प्रभु के गर्भ के प्रभाव से माता ने रात्री के घोर अंधकार में सर्प को जाते हुए देखा लिया था, अत: प्रभु का नाम “पार्श्व” रकः गया|


Father’s Name————————- Asvasena
Mother’s Name ————————Vama
Birth Place —————————– Varanasi
Birth Thithi —————————-Paush ku  10
Diksha Thithi ————————- Chaitra ku  4
Kevalgyan Thithi ——————– Chaitra ku.4
Naksharta[——————————Trivisakha
Diksha Sathi —————————300
Shadhak Jeevan———————- 70 years
Age Lived —————————— 100 years
Lakshan Sign ————————- Nag
Neervan Place ———————— Sammed Sheekharji
Neervan Sathi————————- 33
Neervan Thithi ———————–Shravan su 8
Colour————————————Blue


 ***** जिन दर्शन स्तुति (Jin Darshan Stuti)*****

 

पासं पायसं गुणरासिठानं ,

वंदे पमोएण अनंतणानं |

णामेण पावं विलयं हि जनती,

सो पासणाहो मम देहि संति |

इसका अर्थ है : प्रकाश करने वाले, गुण राशिओ के स्थान , अनंत ग्यानी ऐसे पार्शवनाथ को प्रमोद पूर्वक वंदन करता हूँ, जिनके नाम से पापों का नाश होता है, वे पार्शवनाथ मुझे शान्ति देवे |