Shree Neminath Bhagwan

श्री नेमिनाथ भगवान

 

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22. Shree Neminath Bhagwan 

 

नेमिनाथ : बावीसवें तीर्थंकर नेमिनाथ के पिता का नाम राजा समुद्रविजय और माता का नाम शिवादेवी था।

आपका जन्म श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी को शौरपुरी (मथुरा) में यादववंश में हुआ था।

शौरपुरी (मथुरा) के यादववंशी राजा अंधकवृष्णी के ज्येष्ठ पुत्र समुद्रविजय के पुत्र थे नेमिनाथ।

अंधकवृष्णी के सबसे छोटे पुत्र वासुदेव से उत्पन्न हुए भगवान श्रीकृष्ण।इस प्रकार नेमिनाथ और श्रीकृष्ण दोनों चचेरे भाई थे।

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को आपने दीक्षा ग्रहण की तथा आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को गिरनार पर्वत पर कैवल्य की प्राप्ति हुई।

आषाढ़ शुक्ल की अष्टमी को आपको उज्जैन या गिरनार पर निर्वाण प्राप्त हुआ।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार आपका प्रतीक चिह्न-शंख, चैत्यवृक्ष- मेषश्रृंग, यक्ष- पार्श्व, यक्षिणी-बहुरूपिणी।


प्रभु के नाम करण में गर्भित रहस्य 

नेमिनाथ : गर्भ के प्रभाव से माता ने स्वप्न में काले अरिष्ट रत्नमाय आकाश में उछलता चक्र देखा था – अत: प्रभु का नाम “नेमी” रखा गया |

 

Father’s Name ————————- Samudra Vijay
Mother’s Name ————————-Shiva devi
Birth Place —————————— Sauryapur
Birth Thithi——————————Sharvan ku. 5
Diksha Thithi —————————Sharvan ku. 6
Kevalgyan Thithi ———————-Ashwan ku 15.
Naksharta ——————————–Chitra
Diksha Sathi —————————- 1000
Shadhak Jeevan————————700 years
Age Lived ——————————-   1000 years
Lakshan Sign ————————–   Shankh  (Counch)
Neervan Place ————————-   Ujjaintgiri
Neervan Sathi ————————–  536
Neervan Thithi ————————-Aashadh su.8
Colour————————————- Blue


***** जिन दर्शन स्तुति (Jin Darshan Stuti)*****

भोग्गं हि चिच्चा सुहजोगजुत्तो,

बमभंधरो नेमि तिगुत्तिगुत्तो |

उज्जिंतसेले कयकम्मअंतो,

सिद्धिं स मे देहि वरं भयंतो

इसका अर्थ है : भोगों को त्यागकर, शुभ योग से युक्त,ब्रमचार्य के धारक, तीन गुप्ती से गुप्त श्री नेमिनाथ भगवान गिरनार शिखर पर जिन्होनें कर्मों का अंत किया है , भय का अंत करने वाले वे मुझे क्षेष्ठ सिद्धि को देवे|