Shree Munisuvratswami Bhagwan

श्री मुनिसुव्रतस्वामी भगवान

 

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20. Shree Munisuvratswami Bhagwan

 

मुनिसुव्रतनाथ : बीसवें तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ के पिता का नाम सुमित्र तथा माता का नाम प्रभावती था।

आपका जन्म ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की आठम को राजगढ़ में हुआ था।

फाल्गुन कृष्ण पक्ष की बारस को आपने दीक्षा ग्रहण की तथा फाल्गुन कृष्ण पक्ष की बारस को ही कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई।

ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की नवमी को सम्मेद शिखर पर निर्वाण प्राप्त हुआ।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार आपका प्रतीक चिह्न-कूर्म, चैत्यवृक्ष- चंपक, यक्ष- भृकुटि, यक्षिणी-विजया।


प्रभु के नाम करण में गर्भित रहस्य 

मुनिसुव्रत स्वामी : प्रभु के गर्भ में आने के बाद प्रभु के माता-पिता मुनि की तरह श्रावक जीवन के बारह – व्रत पालन करने लगे , अत: प्रभु का नाम “मुनिसुव्रत” रखा गया|


Father’s Name ————————–Sumitra
Mother’s Name ————————-Padmavati
Birth Place ——————————-Rajgraha
Birth Thithi——————————Jayesth ku. 8
Diksha Thithi————————— Falgun su.12
Kevalgyan Thithi ———————-Falgun su.12
Naksharta———————————Shravan
Diksha Sathi —————————– 1000
Shadhak Jeevan ———————–   7,500 years
Age Lived ——————————— 30,000 years
Lakshan Sign —————————–Tortoise
Neervan Place —————————Sammed Sheekharji
Neervan Sathi ————————— 1000
Neervan Thithi ————————–Jayesth ku 9
Colour————————————– Golden


***** जिन दर्शन स्तुति (Jin Darshan Stuti)*****

वंदे जिनिंदम मूनसुव्वयं तं,

दुट्ठट्ठकम्मान कयं हु अंतं|

सोहा अणुणा विहि जस्स संती,

सो देहि सोभाजसकित्तीकांति |

इसका अर्थ है : दृष्ट आठ कर्मो का अंत करने वाले मुनिसुव्रत स्वामी जिनेन्द्र को मई वंदन करता हूँ| जिनकी – शोभा,अन्यून है, जिनका भाग्य अति सुन्दर है, वह शोभा-यश, कीर्ति एवं कांति देवे |