Shree Mallinath Bhagwan

श्री मल्लीनाथ भगवान

 

19

19. Shree Mallinath Bhagwan

 

मल्लिनाथ : उन्नीसवें तीर्थंकर मल्लिनाथ के पिता का नाम कुंभराज और माता का नाम प्रभावती (रक्षिता) था।

मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष की ग्यारस को आपका जन्म मिथिला में हुआ था। मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष की एकादशी को दीक्षा ग्रहण की तथा इसी माह की तिथि को कैवल्य की प्राप्ति भी हुई।

फाल्गुन कृष्ण पक्ष की बारस को सम्मेद शिखर पर निर्वाण प्राप्त हुआ।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार आपका प्रतीक चिह्न- कलश, चैत्यवृक्ष- कंकेली (अशोक), यक्ष-वरुण, यक्षिणी- जया है।


प्रभु के नाम करण में गर्भित रहस्य

मल्लिनाथ : प्रभु के गर्भ में आने के बाद प्रभु की माता को षडऋतु के फूलों को शय्या में सोने का दोहद पैदा हुआ था – जिसे देवताओं ने पूर्ण किया था – अत: प्रभु का नाम “मल्लिनाथ” रखा गया|


Father’s Name ———————–  Kumbharaj
Mother’s Name ———————-  Prabhavati
Birth Place—————————– Mithila
Birth Thithi————————— Margshirsh su  11
Diksha Thithi————————- Margshirsh su  11
Kevalgyan Thithi ——————–Margshirsh su  11
Naksharta ——————————Ashwini
Diksha Sathi————————— 300
Shadhak Jeevan———————- 54,900 years
Age Lived——————————  55,000 years
Lakshan Sign————————-  Kalash
Neervan Place ———————–  Sammed Sheekarji
Neervan Sathi ———————— 1000
Neervan Thithi———————– Falgun su 12
Colour ———————————-  Golden


***** जिन दर्शन स्तुति (Jin Darshan Stuti)*****

मल्लीमुनिंदों सुखवल्लीकंदों ,

मोहारिमल्लाण हरो दमिंदो |

कल्लाणकारी सुहधम्मधारी ,

देज्जो सुहं सो भावरेणुवारी |

इसका अर्थ है : मुनीन्द्र मल्लिनाथ प्रभु , सुख की वेल के मूल समान, मोह मल्ल शत्रुओ का हरण करने एवं दमन करने में सर्वश्रेष्ठ ,(प्राणी मात्र का)कल्याण करने वाले , शुभ धर्म धारक , भव रुपी राज को हटाने वाले (ऐसे) वे (मुझे) सुख देवे|