Shree Arnath Bhagwan

श्री अरनाथ भगवान

 

18

18. Shree Arnath Bhagwan

 

अरहनाथजी : अठारहवें तीर्थंकर अरहनाथजी या अर प्रभु के पिता का नाम सुदर्शन और माता का नाम मित्रसेन देवी था।

आपका जन्म मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन ‍हस्तिनापुर में हुआ।मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष की ग्यारस को आपने दीक्षा ग्रहण की तथा कार्तिक कृष्ण पक्ष की बारस को कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई।मार्गशीर्ष की दशमी के दिन सम्मेद शिखर पर निर्वाण की प्राप्ति हुई।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार उनका प्रतीक चिह्न-तगरकुसुम (मत्स्य), चैत्यवृक्ष- आम्र, यक्ष- कुबेर, यक्षिणी- महामानसी है।


प्रभु के नाम करण में गर्भित रहस्य

अरनाथ : प्रभु के गर्भ के प्रभाव से माता ने स्वप्न में रत्नमय आरे और स्तुभ देखे थे , अत: प्रभु का नाम “अर” रखा गया |

 

Father’s Name————————Sudarsana
Mother’s Name ———————- Mitrasena Devi
Birth Place—————————–Hastinapur
Birth Thithi————————— Margshirsh su  10
Diksha Thithi ————————-Margshirsh su  11
Kevalgyan Thithi——————– Kartik su 12
Naksharta—————————— Revati
Diksha Sathi————————–  1000
Shadhak Jeevan———————  21,000 years
Age Lived——————————  84,000 years
Lakshan Sign ————————- Meen
Neervan Place ———————— Sammed Sheekarji
Neervan Sathi————————- 1000
Neervan Thithi———————– Margshirsh su  10
Colour ———————————– Golden


***** जिन दर्शन स्तुति (Jin Darshan Stuti)*****

आईयरो णाहअरो हि अंते ,

युत्ते विभत्ती सुह नाम संते |

को अम्ह जीवं कुणए अयानो ,

वंदामी तं सो जीणरायराणो |

इसका अर्थ है : संसार रुपी इस सागर को पार करने के लिए अंतत: तो संत(साधु) के साथ जुड़ना (संयम लेना) ही सुखरूप है| उसके बिना हमारे जैसे अज्ञानी जीवों को कौन पार लगाएगा ? इसलिए हे अरनाथ जिनराज ! मई आपको वंदन करता हूँ |