Shree Shantinath Bhagwan

श्री शांतिनाथ भगवान

 

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16. Shree Shantinath Bhagwan

 

शांतिनाथ : जैन धर्म के सोलहवें तीर्थंकर शांतिनाथ का जन्म ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को हस्तिनापुर में इक्ष्वाकू कुल में हुआ।

शांतिनाथ के पिता हस्तिनापुर के राजा विश्वसेन थे और माता का नाम आर्या (अचीरा) था।

आपने ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को दीक्षा ग्रहण की तथा पौष शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन आपको कैवल्य की प्राप्ति हुई। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को सम्मेद शिखर पर निर्वाण प्राप्त हुआ।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार आपका प्रतीक चिह्न- हिरण, चैत्यवृक्ष-नंदी, यक्ष- गरुढ़, यक्षिणी-अनंतमती हैं।


प्रभु के नाम करण में गर्भित रहस्य 

शांतिनाथ भगवान : शहर में फैला हुए मारि के उपद्रव को प्रभुमाता ने जल के छिडकाव द्वारा दूर कर दिया अत: प्रभु का नाम “शांति” रखा गया|

 

Father’s Name ———————–Vishvasen
Mother’s Name ———————-Aira(Achira)
Birth Place—————————- Hastinapur
Birth Thithi—————————Jayesth ku. 13
Diksha Thithi ————————Jayesth ku. 14
Kevalgyan Thithi ——————-Paush su. 9
Naksharta —————————- Bharni
Diksha Sathi ————————- 1000
Shadhak Jeevan——————–  25,000 years
Age Lived —————————–1,00,000 years
Lakshan Sign————————-Deer
Neervan Place————————Sammed Sheekarji
Neervan Sathi————————900
Neervan Thithi ——————— Jayesth ku. 13
Colour ———————————  Golden


***** जिन दर्शन स्तुति (Jin Darshan Stuti)*****

संतोवसंतं समससुत्तीमितं ,

देही ममं संतीसुख सदित्तं |

सोगं सरोगं हरए स ईसा ,

सो चक्कवट्टी सुसमो जगिसो |

इसका अर्थ है : शांत – उपशांत,शत्रु-मित्र में सम भाव वाले , ऐसे शांतिनाथ प्रभु हमेशा मुझे सुख और शांति प्रदान करे| जो प्रभु शोक व रोग को दूर करते है, वे चक्रवर्ती (धर्म चक्रवर्ती शांतिनाथ) जो सदा समभाव में रहने वाले सुन्दर जगदीश्वर है|