Shree Suvidhinath Bhagwan

श्री सुविधिनाथ भगवान

 

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9. Shree Suvidhinathji Bhagwan

 

सुविधिनाथ : नवें तीर्थंकर पुष्पदंत को सुविधिनाथ भी कहा जाता है।

आपके पिता का नाम राजा सुग्रीव राज तथा माता का नाम रमा रानी था, जो इक्ष्वाकू वंश से थी।

मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की पंचमी को काकांदी में आपका जन्म हुआ। मार्गशीर्ष के कष्णपक्ष की छट (6) को आपने दीक्षा ग्रहण की तथा कार्तिक कृष्ण पक्ष की तृतीय (3) को आपको सम्मेद शिखर में कैवल्य की प्राप्ती हुई।

भाद्र के शुक्ल पक्ष की नवमी को आपको सम्मेद शिखर पर निर्वाण प्राप्त हुआ।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार आपका प्रतीक चिह्न- मकर, चैत्यवृक्ष- अक्ष (बहेड़ा), यक्ष- ब्रह्मा, यक्षिणी- काली है।


प्रभु के नाम करण में गर्भित रहस्य 

सुविधिनाथ : प्रभु के गर्भ में आने के बाद प्रभु के माता-पिता विधिपूर्वक धर्म की आराधना करने लगे, अत: प्रभु का नाम “सुविधि” रखा गया अथवा मचकुंद के पुष्प के समान प्रभु की दंतपंक्ति होने से प्रभु का नाम “पुष्पदंत” रखा गया|


Father’s Name ————– Sugriv Raja
Mother’s Name ————–Rama Rani
Birth Place ——————- Kakandi
Birth Thithi ——————Margshirsh ku 5
Diksha Thithi ————— Margshirsh ku 6
Kevalgyan Thithi ———–Kartik su 3
Naksharta ——————–  Mul
Diksha Sathi —————– 1,000
Shadhak Jeevan ———–  1,00,000 purva
Age Lived ——————–  2,00,000 purva
Lakshan Sign —————  Crocodile
Neervan Place ————– Sammed Sheekharji
Neervan Sathi ————–  1000
Neervan Thithi ————-Bhadra su  9
Colour ————————  Shukla


***** जिन दर्शन स्तुति (Jin Darshan Stuti)*****

देज्जा सुबुधिम सुविहीजिनंदा,

कट्ठं तम्मं णासण भो दीनंदा |

चारित्तमग्गं कहने सुसीला ,

पत्ता सिवं जत्थ आनंतलीला |

इसका अर्थ है : कष्ट रुपी अंधकार का नाश करने वाले है सूर्य !(जो) चारित्र मार्ग के कथन में सुन्दर स्वभाव वाले है , जहाँ अनंत आनंद है ऐसे मोक्ष को प्राप्त हे सुविधि जिनेन्द्र ! (मुझे) सुबुधि देवें |