Shree Padmaprabhaswami Bhagwan

श्री पद्माप्रभस्वामी भगवान

 

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6. Shree Padmaprabhaswami Bhagwan

 

पद्ममप्रभुजी : छठवें तीर्थंकर पद्मप्रभुजी के पिता का नाम धरण राज और माता का नाम सुसीमा देवी था।

कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी को आपका जन्म वत्स कौशाम्बी में हुआ। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को आपने दीक्षा ग्रहण की तथा चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन आपको कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई।

फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आपको सम्मेद शिखर पर निर्वाण प्राप्त हुआ।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार उनका प्रतीक चिह्न-कमल, चैत्यवृक्ष- प्रियंगु, यक्ष-मातंग, यक्षिणी-अप्रति चक्रेश्वरी है।



Father’s Name —————– Dharanraj
Mother’s Name —————- Susima Devi
Birth Place ———————- Kaushambi
Birth Thithi ———————Kartik ku 12
Diksha Thithi —————— Kartik ku 13
Kevalgyan Thithi ————- Chaitra su 15
Naksharta ————————Chitra
Diksha Sathi ——————— 1,000
Shadhak Jeevan —————  1,00,000 purva
Age Lived ————————  30,00,000 purva
Lakshan Sign ——————- Padmakamal
Neervan Place —————— Sammed Sheekharji
Neervan Sathi —————— 308
Neervan Thithi—————– Falgun Krishana 14
Colour  —————————- Red


***** जिन दर्शन स्तुति (Jin Darshan Stuti)*****

णीद्धाडीयं जेण हि अट्टकम्मं,

पत्तो सिवं साइअंतरम्मं |

णत्थी तित्तनो आगमनं ही तस्स,

णीचचं णमो तं पउमप्पहस्स |

इसका अर्थ है : जिन्होनें आठ कर्म दूर कर दिए है, जो साडी-अनंत काल तक रम्य ऐसी शिव लक्ष्मी को प्राप्त कर चुके है एवं निश्चय से जिनका पुनः आगमन नहीं है , उन् पद्मप्रभु स्वामी को नित्य नमस्कार हो |