Shree Sumtinath Bhagwan

श्री सुमतिनाथ भगवान

 

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5. Shree Sumtinath Bhagwan

 

सुमतिनाथजी : पाँचवें तीर्थंकर सुमतिनाथजी के पिता का नाम मेघरथ या मेघप्रभ तथा माता का नाम सुमंगला था।

बैशाख शुक्ल की अष्टमी को साकेतपुरी (अयोध्या) में आपका जन्म हुआ। कुछ विद्वानों अनुसार आपका जन्म चैत्र शुक्ल की एकादशी को हुआ था।

बैशाख शुक्ल की नवमी के दिन आपने दीक्षा ग्रहण की तथा चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी को आपको कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई।

चैत्र शुक्ल की एकादशी को सम्मेद शिखर पर आपको निर्वाण प्राप्त हुआ।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार उनका प्रतीक चिह्न- चकवा, चैत्यवृक्ष- प्रियंगु, यक्ष- तुम्बुरव,यक्षिणी- वज्रांकुशा है।


प्रभु के नाम करण में गर्भित रहस्य

पद्मप्रभ स्वामी : प्रभु के गर्भ में आने के बाद माता को पद्मशय्या पर सोने का दोहद उत्पन्न होने से पुत्र का नाम “पद्मप्रभ” रखा गया|

Father’s Name ——————-Meghrath
Mother’s Name —————– Sumangla
Birth Place ———————– Ayodhya
Birth Thithi ———————-Baishak su 8
Diksha Thithi ——————- Baishak su 9
Kevalgyan Thithi ————– Chaitra su 11
Naksharta ———————— Magha
Diksha Sathi ——————— 1,000
Shadhak Jeevan —————- 1,00,000 purva
Age Lived ————————- 40,00,000 purva
Lakshan Sign ——————– Chrouch
Neervan Place——————-  Sammed Sheekharji
Neervan Sathi ——————- 1,000
Neervan Thithi—————–  Chaitra sukla  11
Colour —————————-   Golden


***** जिन दर्शन स्तुति (Jin Darshan Stuti)*****

शुद्धं सरुवं समसुक्खदुक्खं ,

सारं सुसारं सुविसाल-सुक्खं |

आणंदकंदे सययं पयासं,

वंदे सयाहं सुमइम सुवासं |

इसका अर्थ है : शुद्ध स्वरूपी, सुख-दुःख में समभावी , उत्तम, शेष्ठ , विशाल मोक्ष सुख को प्राप्त, हमेशा आनंद कंद पर प्रकाश स्वरुप, सुवास स्वरुप , ऐसे सुमतिनाथ भगवान को मई हमेशा वंदन करता हूँ|