Shree Ajitnath Bhagwan

श्री अजितनाथ भगवान

 

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2. Shree Ajitnathji Bhagwan

 

अजीतनाथजी : द्वितीय तीर्थंकर अजीतनाथजी की माता का नाम विजया और पिता का नाम जितशत्रु था।

आपका जन्म माघ शुक्ल पक्ष की दशमी को अयोध्या में हुआ था। माघ शुक्ल पक्ष की नवमी को आपने दीक्षा ग्रहण की तथा पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी को आपको कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई।

चैत्र शुक्ल की पंचमी को आपको सम्मेद शिखर पर निर्वाण प्राप्त हुआ।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार उनका प्रतीक चिह्न- गज, चैत्यवृक्ष- सप्तपर्ण,यक्ष- महायक्ष, यक्षिणी- रोहिणी है।


प्रभु के नाम करण में गर्भित रहस्य

अजितनाथ : प्रभु की माता पांसे के खेल में पहले हार जाती थी…. परन्तु प्रभु के गर्भ में आने के बाद माता को कोई जीत न सका, अत: प्रभु का नाम “अजित” रखा गया|

 

Father’s Name ———————-Jitshatru
Mother’s Name ———————Vijaya
Birth Place —————————Ayodhya
Birth Thithi ————————- Magh Shukla  10
Diksha Thithi ———————–Magh ku 9
Kevalgyan Thithi ——————Paush su 11
Naksharta —————————-Rohini
Diksha Sathi ————————  1000
Shadhak Jeevan ——————- 1,00,000 purva
Age Lived —————————-  72,00,000 purva
Lakshan Sign ———————–  Elephant
Neervan Place ———————- Sammed Sheekharji
Neervan Sathi ———————- 1,000
Neervan Thithi ——————— Chaitra Sukla. 5
Colour ——————————–  Golden


***** जिन दर्शन स्तुति *****

झाणायणो णाणयरो जणानं,

रिद्धि – समिद्धि – धीइ – धूअठाणं |

जोगं जगणाण – जीणाण राणं ,

अज्जं अरुवं अजियं णमामि |

इसका अर्थ है : लोक के ध्यान का स्थान एवं जगत के जीवों के ज्ञानदाता, रिद्धि-समृद्धि-धृति के ध्रुव स्थान , रत्नत्रय रूप, योग युक्त, विश्व में विज्ञान से जीनों में राजा सम, जिनेन्द्र देव कर्म रोग रहित ऐसे अजितनाथ भगवान को प्रणाम करता हूँ |