Shree Aadinaath Bhagwan

श्री आदिनाथजी भगवान

 

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1. Shree Aadeshwar Bhagwan (Aadinathji) 

 

आदिनाथ : प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ को ऋषभनाथ भी कहा जाता है और हिंदू इन्हें वृषभनाथ कहते हैं।

आपके पिता का नाम राजा नाभिराज था और माता का नाम मरुदेवी था। आपका जन्म चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी-नवमी को अयोध्या में हुआ।

चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आपने दीक्षा ग्रहण की तथा फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन आपको कैवल्य
की प्राप्ती हुई।

कैलाश पर्वत क्षेत्र के अष्टपद में आपको माघ कृष्ण-14 को निर्वाण प्राप्त हुआ।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार आपका प्रतीक चिह्न- बैल, चैत्यवृक्ष- न्यग्रोध, यक्ष- गोवदनल,यक्षिणी-चक्रेश्वरी हैं।


प्रभु के नाम करण में गर्भित रहस्य

ऋषभदेव : तीर्थंकर की माता को जो चौदह स्वप्न आते है, उसमें पहला सिंह स्वप्न है… किंतु मरूदेवी माता ने पहले स्वप्न में वृषभ को देखा था अत: प्रभु का नाम वृषभ/ऋषभ रखा गया|

 

Father’s Name ———————–  Nabhiraja
Mother’s Name ———————-  Marudevi
Birth Place —————————- Ayodhya
Birth Thithi ————————–  Chaitra krishna 8
Diksha Thithi ———————— Chaitra krishna 8
Kevalgyan Thithi ——————– Falgun krishna 8
Naksharta —————————– Uttrashadha
Diksha Sathi ————————– 4000
Shadhak Jeevan ——————— 1,00,000 purva
Age Lived —————————— 84,00,000 purva
Lakshan Sign————————–Vrushabha
Neervan Place———————— Asthapad
Neervan Sathi ———————— 10000
Neervan Thithi———————— Magh Krishna 14
Colour ———————————- Golden


***** जिन दर्शन स्तुति / Jin Darshan Stuti *****

आइसरो तित्थयरो जिनिंदों,

देविंदचंदों सुर-भूजपज्जो |

आभासियं जेण सैमग्गसत्थं,

वंदामी तं नं उसहं सम्त्थं |

इसका अर्थ है : तीर्थंकर आदिश्वर जिनेन्द्र, देवताओं में चन्द्र है एवं सुरेन्द्र के द्वारा पूज्य, जिनके द्वारा समग्र शास्त्र की प्ररूपणा हुई है, सामर्थ्ययुक्त ऐसे श्री ऋषभदेव को वंदन करता हूँ|