श्री बलेजा पार्श्वनाथ

श्री बलेजा पार्श्वनाथ – बलेजगाँव

 

सौराष्ट्र देश में पोरबंदर से ४२ कि.मी. दूर बलेज नाम के छोटे से गाँव श्री बलेजा पार्श्वनाथ का यह आया हुआ है| फने रहित ३३ इंच ऊँचे और २९ इंच चौड़े पद्मासन में बिराजमान बलेजा पार्श्वनाथ प्रभु के दर्शन-वंदन व पूजन से भक्त ह्रदय नाच उठता है| कींवदंती है की एक बार एक सार्थवाह जहाज में बैठकर समुद्र पार कर रहा था| जहाज क्रमश: आगे बढ़ रहा था| अचानक ही उसका स्तंभित हो गया| सार्थवाह सोच में पद गया| वह सार्थवह जहाज के स्थंबन के कारणों की शोध करने लगा| उसी समय समुद्र के जल में से एक तेजस्वी जिनबिम्ब उसे प्राप्त हुआ| जिनबिंब के दर्शन कर उसका मन मयूर नाच उठा|

उसने वह प्रतिमाजी बलेज गाँव में बिराजमान किए| एक मनोहर जिनमंदिर का निर्माण किया| और उसके मुलनायक के रूप में बलेजा पार्श्वनाथ प्रभु की स्थापना की गई|

वर्तमान जिनालय का निर्माण पोरबंदर निवासी भीमजी कल्यानजी ने कराया था और उसकी प्रतिष्ठा वि.सं. १९०५ महावदी ३ के दिन आ. श्री जिनेन्द्रसूरीश्वर्जी के हाथों से कराई थी|