श्री मनमोहन पार्श्वनाथ

श्री मनमोहन पार्श्वनाथ – कम्बोई तीर्थ

 

कम्बोई गाँव लगभग विक्रम की ग्यारहवी सदी पूर्व बसा होगा, ऐसा एक भेटपत्र से साबित होता है| प्रतिमा की आकृति व कला से यह प्रतिमा राजा सम्प्रतिकालीन की मानी जाती है | मंदिर में अन्य प्रतिमाओं पर सोलहवी शताब्दी के लेख है| सत्रहवी शताब्दी की पाटण चैत्य परिपाटी में कम्बोई तीर्थ का उल्लेख है| विक्रम सं. १६३८ की एक धातु प्रतिमा पर कम्बोई गाँव का उल्लेख है| अंतिम जिणोरद्वार विक्रम सं. २००३ में संपन्न हुआ|

यह क्षेत्र प्राचीन तीर्थो में गिना जाता है| यहाँ प्रति वर्ष फाल्गुण शुक्ल २ को मेला भरता है, जब हजारों यात्रिगन इक्कठे होते है|

प्रभु प्रतिमा अति ही शांत व सुन्दर है| इसी मंदिर में विराजित अन्य प्रतिमाएं भी राजा सम्प्रतिकालीन की होने के कारण कलात्मक है| गाँव में भी कहीं कहीं प्राचीन प्रतिमाएं पाई जाती है, जिनकी कला दर्शनीय है|