श्री अलौकिक पार्श्वनाथ

श्री अलौकिक पार्श्वनाथ – हसाम पुरा

 

मंदिर में स्तिथ प्राचीन कलात्मक अवशेष ,स्तंभन व परिकर आदि के अवलोकन से पता लगता है की यह मंदिर लगभग विक्रम की दसवी सदी पूर्व का होगा| बारहवी सदी की बनी धातु की चौविसी मंदिर में विधमान है| मुसलामानों के शासन काल में अनेकों मंदिरों को क्षरती पहुंची, उसमे यह मंदिर भी रहा होगा, ऐसा अनुमान लगाया जाता है| पुन: जिणोरद्वार विक्रम सं. १६४९ में होने का उल्लेख है|

कहा जाता है की राजा विक्रमआदित्य के काल में उज्जैन नगरी का यह एक मोहल्ला तह व् राजा विक्रमआदित्य का महल यहाँ पर था| इसके निकट रानी का महल था, जिसे आज रानीकोट कहते है|

यहाँ अनेकों चमत्कारिक घटनाएं घटने के प्रमाण मिलते है| कहा जाता है की एक वक़्त कुछ प्रवासियों ने इसके निकट माँस पकाने का उपक्रम किया| तुरंत अदृश्य रूप से उन पर पत्थरो की बौछार होने लगी, जिससे वे भाग खड़े हुए| एक बार कुछ श्रावक प्रतिमाएं उजैन ले जाना चाहते थे| वार्तालाप के बाद श्रावकगण दर्शनार्थ मंदिर में आये| तब प्रभु प्रतिमा के पास बैठा सर्प नकारत्मक संकेत करता नजर आया| उस पर उन्होंने अपना विचार स्थगित किया| ऐसे और भी अनेक घटनाओं के वृतांत भक्तो द्वारा बताये जाते है|