श्री शेरिसा पार्श्वनाथ

श्री शेरीसा पार्श्वनाथ – श्री शोरीसा तीर्थ

 

कहा जाता है की शोरिसा किसी समयसोनपुर नगरी का एक अंग था| आज उस सोनपुर का तो नामोनिशान नहीं है, लेकिन शेरिसा आज भी एक भव्य व मनोरम तीर्थ स्थान है| इस जगह की प्राचीनता के चिन्ह खण्डहर अवशेषों व स्तंभों आदि में आज भी यहाँ पाए जाते है| वीर निर्वाण की १८ वि (विक्रम की १३वि) शताब्दी में श्री देवचन्द्राचार्यजी द्वारा श्री पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाने करवाने का उल्लेख है| उस समय पार्श्वप्रभु की प्रतिमा श्री “लोढन पार्श्वनाथ” के नाम से प्रसीद्ध थी| यहाँ पर एक खंडित प्रतिमा के परिवार पर अंकित लेख से ज्ञात होता है की विक्रम की १३वि शताब्दी में मंत्री वास्तुपाल-तेजपाल ने अपने भाई मालदेव व उनके पुत्र पुनसिंह प्रतिष्टित करवाया था| इन सबसे यह सिद्ध होता है की यह उससे भी प्राचीन है| कविवर लावण्यासमय ने विक्रम संवत् १५६२ में बड़े ही सुन्दर ढंग से “शेरिसा तीर्थ स्तवन” की भक्तिभाव पूर्वक रचना की है| इस कारण यह भी कहा जा सकता हैकि इस तीर्थ की जाहोजलाली सदियों से बनी है| यहाँ पर समय-समय पर आवश्यक जिणोरद्वार होते रहे| विक्रम की १६वि शताब्दी के पश्चात किसी समय मुस्लिम आक्रमणकारों के हाथ यह तीर्थ खंडित हुआ|विक्रम संवत् १६५५ में खंडित जिनालय के खंडहरों की खुदाई करने पर कुछ प्रतिमाएं प्राप्त हुई, उन्हें एक ग्वाले का घर खरीद कर उसमे बिराजमान की| विक्रम संवत् १६८८ में पांच प्रतिमाओं पर लेप करवाया गया व अहमदाबाद के क्षेष्टि साराभाई डाह्याभाई निर्मित नूतन जिनालय की विक्रम संवत् २००२ में तीर्थोद्वारक निर्मित संवत् २००२ में तिर्थोद्वारक आचार्य श्री विजयनेमीसुरिश्वर्जी के हाथो वैशाख शुक्ला दशम के दिन प्रतिष्ठा संपन्न हुई|

यहाँ पर भोयंरे में स्तिथ श्री पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा अत्याधीक सुन्दर व अपने आप में अनूठी है| यहाँ की पद्मावती देवी की प्राचीन सुन्दर प्रतिमा अभी नरोदा गाँव में है, जी दर्शनीय है|