श्री पल्लविया पार्श्वनाथ

श्री पल्लविया पार्श्वनाथ – प्रहलादनपुर तीर्थ

 

आबू के पराक्रमी परमारवंशी राजा श्री धारावर्षदेव के भाई श्री प्रहलादन ने अपने नाम पर प्रह्लाद्नपुर नगरी बसाई थी| बाद में इसका नाम पालनपुर में परिवर्तित हुआ| इसका इतिहास विक्रम की तेहरवी सदी के प्रारंभ का माना जाता है|

चमताकारिक घटनाओं के पश्चात राजा प्रहलादन जैन धर्म के अनुनायी बने व इस मंदिर का निर्माण करवाकर श्री पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा प्रतिष्टित करवाई थी, ऐसा उल्लेख है| वि.सं. १२७४ फाल्गुण शुक्ला पंचमी के शुभ दिन कोरंट गच्छाचार्य श्री कक्कसूरीश्वर्जी के शुभ हस्ते वर्तमान प्रतिमा की प्रतिष्ठा संपन्न हुई| राजा प्रहलादन द्वारा निर्मित होने के कारण पहले यह मंदिर श्री प्रहलादन पार्श्वनाथ मंदिर के नाम से विख्यात था| अभी यह पल्लविया पार्श्वनाथ मंदिर के नाम से प्रचलित है|

कहा जाता है, परमार वंशी पराक्रमी राजा श्री प्रह्लादनने आबू देलवाड़ा की धातुमयी एक विशाल प्रतिमा को गला कर अचलेश्वर महादेव मंदिर के लिए नन्दी बनवाया था, जिसके कारण राजा कृष्ठ रोग से पीड़ित होकर अत्यंत कष्ट सहने लगे| अंत में राजा व्याकुल होकर जंगल में चला गया| जंगल में आचार्य श्री शालीभद्र सूरीश्वर्जी से उनकी भेंट हुई| राजा ने सारा वृतांत सुनाया व निवारण पाने के लिए प्रार्थना की | आचार्य श्री ने कुष्ठ रोग से पीड़ित राजा को आशीर्वाद देकर प्रायश्चित स्वरुप श्री पार्श्वनाथ भगवान का मंदिर बनवाकर प्रभु-प्रतिमा का न्हवन जल शरीर पर लगाने की सलाह दी|आचार्यश्री के उपदेशनुसार भव्य मंदिर का निर्माण हुआ| देवाधिदेव श्री पार्श्वनाथ प्रभु की प्रतिमा को अति ही विराट मोहत्सव के साथ हर्षोल्लास पूर्वक प्रतिष्टित करवाया गया| प्रभु प्रतिमा के न्हवन जल का उपयोग करने पर राजा का कुष्ठ रोगचला गया| भक्तजन प्रभु को पहलविया पार्श्वनाथ कहने लगे| राजा अपने को कृतार्थ समझने लगा व जैन धर्मंवल्म्भी बनकर धर्म प्रभावना व उत्थान के अनेकों कार्य किये| राजा खुद भी विद्धान था, अत: अनेकों ग्रंथो की रचनाएं की| उनके द्वारा रचित ग्रंथो में “पार्श्व पराक्रम व्यायोग” नाम का ग्रन्थ आज भी विख्यात है|

सुप्रसीध राणकपुर तीर्थ के प्रतिष्ठाचार्य युगप्रधान आचार्य श्री सोम सुन्दरसूरीश्वर्जी का जन्म वि.सं. १४३० में इसी नगरी में हुआ था| अकबर प्रतिबोधक आचार्य श्री हीरविजयसूरीश्वर्जी की भी जन्म भूमि यही है| इनका जन्म वि.सं. १५८३ में यहाँ हुआ था|