श्री नवपल्लव पार्शवनाथ

श्री नवपल्लव पार्श्वनाथ – मांगरोल

जूनागढ़ जिले के मांगरोल शहर में कंपाणी फलिया में श्री नवपल्लव पार्श्वनाथ का भव्य जिनालय है| यह प्रतिमा फने रहित ३३ ऊँची व २७ इंच चौड़ी है|

मांगरोल नगर पहले “मेगलपुर” नाम से प्रसिद्ध था| यहाँ अनेक मंदिर थे| परमार्हत कुमारपाल ने इस मंदिर का निर्माण कराया था और वि.सं. १२६३ में नव पल्लव पार्श्वनाथ की प्रतिष्ठा कराइ थी|

समय सुन्दर उपाध्याय ने “नवपल्लव रास” की रचना की है| उस रचना के अनुसार यह प्रतिमाजी पहले वल्भिपुर में थी| वल्भिपुर का ध्वंस होने पर वहां से कुछ प्रतिमाजी प्रभास पाटण, बिनमाल आदि ले गए|

नवपल्लव पार्श्वनाथ को मांगरोल ले जाने लगे, तब बीच मार्ग में प्रतिमाजी की दो उंगली खंडित हो गयी थी| परंतु एक चमत्कारी घटना बनी और वे दोनों उंगलियाँ पुन पल्लवित हो गई, इस चमत्कार से इस प्रतिमा का नाम “नवपल्लव” पड़ा|