श्री दादा पार्श्वनाथ

श्री दादा पार्श्वनाथ

 

बड़ा से ५ की.मी. दूर प्राचीन बेडा में श्री दादा पार्श्वनाथ का प्राचीन, प्रभावक और चमत्कारी तीर्थ विधमान है| अरावली पर्वत के निकट निर्जन एकांत वातावरण में आए इस तीर्थ का वातावरण अत्यंत ही आहालदक है| विक्रम की ग्यारहवी शताब्दी में इस तीर्थ के निर्माण का अनुमान है| श्री दादा पार्श्वनाथ की गादी पर सं. १६४४ का शिलालेख है|

श्री हीरसूरीश्वर्जी म.सा. के वरद हस्तों से इस प्रतिमा को गादीनशीन करने के पूर्व यहाँ मुलनायक के रूप में श्री आदिनाथ प्रभु बिराजमान थे|

वि.सं. १६५६ में कवी श्री नयसुन्दर विचरित “श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ छंद” में श्री दादा पार्श्वनाथ को “दारिद्घ चुरक” कहा गया है|