श्री सुलतान पार्श्वनाथ

श्री सुलतान पार्श्वनाथ – सिद्धपुर

 

मेहसाना जिले के सिद्धपुर नगर में श्री महावीर स्वामीजी के शिखरबद्ध जिनालय के ऊपर के गम्भारे में मुलनायक के रूप में श्री सुलतान पार्श्वनाथ प्रभु बिराजमान है| फने रहित पद्मासन में रही यह प्रतिमा २५ इंच ऊँची व २५ इंच चौड़ी और संप्रतिकालीन है |

सिद्ध राज जयसिंह ने सिद्धपुर में “सिद्ध विहार” नाम के भव्य-उतुंग चैत्य का निर्माण कराया था, उसी समय महामात्य अलिंगदेव ने चौमुख विहार का निर्माण कराया था| महामात्य अलिंग्देव ने इस चतुमुर्ख विहार में पार्श्वनाथ प्रभु की प्रतिष्ठा कराई थी|

मुस्लिम काल में अल्लाउदीन खिलजी ने इस मंदिर पर भी आक्रमण किया था| उस समय इस प्रतिमा को तोड़ने के लिए समुत्सुक बने अल्लाउदीन को हाथ जोड़कर भक्त भोजको ने कहा, “आप इस प्रतिमा को नष्ट न करे, यह कोई पत्थर नहीं है, साक्षात परमेश्वर है|”

भोजको की प्रार्थना सुनकर बादशाह ने प्रतिमा के परमेश्वररूप होने का प्रमाण माँगा|

भोजको ने संगीत चालु किया और उसी समय घी से भरे ९९ दीपक स्वयं प्रज्वल्लित हो गए| उसी समय एक सर्प सुलतान (बादशाह) के सामने आकर बैठ गया|

प्रतिमा के इस प्रभाव को देख बादशाह लज्जित हो गया और वह बोल उठा,”यह देव तो बादशाह सुलतान है|” इस प्रकार बोलका अल्लाउदीन वैसे ही  वापस लौट गया| उस दिन से “सुलतान” का विशेषण उस प्रतिमा से जुड़ गया|