24 Tirthankars

 

24 Tirthankars

24 Thirthankar Pagliya placed at Shree Sammet Shikharji Tirth - 24 Thirthankars

 

श्री सम्मेद शिखरजी पे विराजमान २४ चरण 

 

 

२४ तीर्थंकर

जैन धर्म में तीर्थंकर (अरिहंतजिनेन्द्र) उन २४ व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है, जो स्वयं तप के माध्यम से आत्मज्ञान (केवल ज्ञान) प्राप्त करते है। जो संसार सागर से पार लगाने वाले तीर्थ की रचना करते है, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। तीर्थंकर वह व्यक्ति हैं जिन्होनें पूरी तरह से क्रोध, अभिमान, छल, इच्छा, आदि पर विजय प्राप्त की हो। तीर्थंकर को इस नाम से कहा जाता है क्योंकि वे “तीर्थ” (पायाब), एक जैन समुदाय के संस्थापक हैं, जो “पायाब” के रूप में “मानव कष्ट की नदी” को पार कराता है।

Shree Aadinath Bhagwan - 24 Thirthankars

1. Shree Aadinaath Bhagwan

Shree Ajitnath Bhagwan - 24 Thirthankars

2. Shree Ajitnath Bhagwan

3. Shree Sambhavnath Bhagwan - 24 Thirthankars

3. Shree Sambhavnath Bhagwan

4. Shree Abhinandan Swami Bhagwan - 24 Thirthankars

4. Shree Abhinandanswami Bhagwan

5. Shree Sumtinath Bhagwan - 24 Tirthankars

5. Shree Sumtinath Bhagwan

6. Shree PadmaPrabhaSwami Bhagwan -24 Thirthankars

6. Shree Padmaprabhaswami Bhagwan

7

7. Shree Suparshvnath Bhagwan

8

8. Shree Chandraprabhswami Bhagwan

9

9. Shree Suvidhinath Bhagwan

10

10. Shree Sheetalnath Bhagwan

11

11. Shree Shreyansnath Bhagwan

12

12. Shree Vasupujyaswami Bhagwan

13

13. Shree Vimalnath Bhagwan

14

14. Shree Ananthnath Bhagwan

15

15. Shree Dharmnath Bhagwan

16

16. Shree Shantinath Bhagwan

17

17. Shree Kuntunath Bhagwan

18

18. Shree Arnath Bhagwan

19

19. Shree Mallinath Bhagwan

20

20. Shree Munisuvratswami Bhagwan

21

21. Shree Naminath Bhagwan

22

22. Shree Neminath Bhagwan

23

23. Shree Parshvanath Bhagwan

24

24. Shree Mahavirswami Bhagwan

 


**तीर्थंकर परमात्मा जी के नव अंग की ही पूजा क्यों की जाती है ?**

नव अंग
१. २ अंगूठा
२. २घुटना
३. २ हाथ
४. २कंधा
५. मस्तक
६. ललाट
७. कंठ
८.  हृदय
९. नाभि ॥

 

प्रश्न १.- अंगूठे की पूजा क्यो की जाती है ?

उत्तर – तीर्थंकर परमात्मा जी ने केवलज्ञान करने के लिए तथा आत्म कल्याण हेतु जन~जन को प्रतिबोध देने के लिए चरणों से विहार किया था, अतः अंगूठे की पूजा की जाती है !

प्रश्न २-. घुटनों की पूजा क्यों की जाती है ?

उत्तर .- घुटनों की पूजा करते समय यह याचना करनी चाहिए की ~•~हॆ परमात्मा~•~ साधना काल मे आपने घुटनों के बल खडे रह कर साधना की थी और केवलज्ञान को प्राप्त किया था मुझे भी ऎसी शक्ति देना की में खडे~खडे साधना कर सकु ॥

प्रश्न ३-. हाथ की पूजा क्यो कि जाती है ?

उत्तर- तीर्थंकर परमात्मा जी ने दिक्षा लेने से पूर्व बाह्म निर्धनता को वर्षिदान देकर दुर किया था और केवलज्ञान प्राप्ति के बाद देशना एवं दिक्षा देकर आंतरिक गरीबी को मिटाया था उसी प्रकार मे भी संयम धारण कर भाव द्रारिद्र को दुर कर संकू !

प्रश्न ४.- कंधे की पूजा क्यों की जाती है ?

उत्तर – . तीर्थंकर परमात्मा जी अनंत शक्ति होने पर भी उन्होने किसी जीव को न कभी दुःखी किया न कभी अपने बल का अभिमान किया वैसे ही आत्मा की अनंत शक्ति को प्राप्त करने एवं निरभिमानी बनने कि याचना कंधों की पूजा के द्वारा की जाती है ॥

प्रश्न ५.- मस्तक की पूजा क्यों की जाती है ?

उत्तर- तीर्थंकर परमात्मा जी केवलज्ञान प्राप्त कर लोक के अग्रभाग सिध्दशिला पर विराजमान हो गये है उसी प्रकार की सिद्धि को प्राप्त करने के लिए मस्तक की पूजा की जाती है ॥

प्रश्न ६– ललाट की पूजा क्यों की जाती है ?

उत्तर – तीर्थंकर परमात्मा जी तीनो लोको मे पूजनीय होने से तिलक के समान है उसी अवस्था को प्राप्त करने के लिए ललाट की पूजा की जाती है ॥

प्रश्न ७-. कंठ कि पूजा क्यों की जाती है ?

उत्तर – . तीर्थंकर परमात्मा जी ने कंठ से देशना दे कर जीवो का उद्धार किया था इस प्रयोजन से कंठ की पूजा की जाती है ॥

प्रश्न – ८. ह्रदय की पूजा क्यों की जाती है ?

उत्तर- तीर्थंकर परमात्मा जी ने उपकारी और अपकारी सभी जीवो पर समान भाव रखने के कारण ह्रदय की पूजा की जाती है ॥

प्रश्न- ९. नाभि की पूजा क्यों की जाती है ?

उत्तर – नाभि मे आठ रुचक प्रदेश है जो कर्म रहित है मेरी आत्मा भी आठ रुचक प्रदेशों की भाँति कर्म मुक्त बने इसी भावना से तीर्थंकर परमात्मा जी के नाभि की पूजा की जाती है|